युवा चेहरों पर दांव, अधिकतम दो साल का कार्यकाल...सत्ता में वापसी की आस में डीएमके के कई बड़े ऐलान

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद DMK ने संगठन में बड़े बदलाव का फैसला किया है. पार्टी अब युवा नेतृत्व, सीमित कार्यकाल और नए संगठनात्मक ढांचे पर जोर देगी.

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Sagar Bhardwaj

तमिलनाडु में चुनावी झटका लगने के बाद एमके स्टालिन की अगुवाई वाली DMK ने संगठन को नए सिरे से तैयार करने का फैसला किया है. शनिवार को अन्ना अरिवालयम में हुई कार्यकारी समिति की बैठक में संगठनात्मक ढांचे में व्यापक बदलाव से जुड़े नौ प्रस्ताव पारित किए गए. पार्टी का जोर अब युवा चेहरों को आगे बढ़ाने और संगठन को ज्यादा प्रभावी बनाने पर है.

78 से बढ़कर 110 होंगे संगठनात्मक जिले

नई व्यवस्था के तहत DMK के संगठनात्मक जिलों की संख्या 78 से बढ़ाकर 110 की जाएगी. प्रत्येक जिले को मोटे तौर पर दो विधानसभा क्षेत्रों के आधार पर व्यवस्थित किया जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर पार्टी की गतिविधियों और प्रशासन को मजबूत किया जा सके. नए जिलों की सीमाएं घोषित होने के बाद जिला समितियों को 15 दिनों के भीतर बैठक बुलानी होगी.

पदों पर उम्र और दो कार्यकाल की सीमा

पार्टी ने कई अहम पदों के लिए अधिकतम उम्र तय करने के साथ लगातार दो कार्यकाल की सीमा लागू करने का फैसला किया है. शाखा समिति सचिव की अधिकतम उम्र 45 वर्ष, जबकि नगर निकाय वार्ड समिति सचिव के लिए 50 वर्ष निर्धारित की गई है. टाउन पंचायत समिति सचिव की उम्र सीमा 60 वर्ष होगी. सभी संबंधित पदों पर अधिकतम दो कार्यकाल की व्यवस्था रहेगी.


स्टालिन बोले- हार स्थायी नहीं

बैठक में स्टालिन ने कहा कि पार्टी ने सिर्फ एक चुनाव गंवाया है, यह स्थायी हार नहीं है. उन्होंने माना कि संगठन के पदाधिकारियों के कामकाज में कमियां भी पराजय की वजह बनीं. स्टालिन के मुताबिक किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराने के बजाय पार्टी ने व्यापक आत्ममंथन का रास्ता चुना है.

शहरों में भी बदलेगा संगठन

कोयंबटूर और तांबरम जैसे बड़े शहरों में ‘सिटी सेक्रेटरी’ का पद समाप्त किया जाएगा. वहीं शहरी समितियों का पुनर्गठन मतदाताओं की संख्या के आधार पर होगा. चेन्नई में प्रत्येक कॉरपोरेशन एरिया कमेटी में औसतन 40 हजार और अन्य निगमों में करीब 30 हजार मतदाता रखने की योजना है.