'अगर 24 घंटे के भीतर...', सोनम वांगचुक ने मोदी सरकार को फिर दी चेतावनी
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली में नेताओं और कार्यकर्ताओं की हिरासत की निंदा की. उन्होंने इसे "अघोषित आपातकाल" बताते हुए रिहाई न होने पर फिर से अनशन या पदयात्रा की चेतावनी दी.
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शनिवार को नई दिल्ली में छात्र नेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की पुलिस हिरासत की सख्त शब्दों में निंदा की. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, पिनाराय विजयन, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया गया. इस स्थिति पर चिंता जताते हुए वांगचुक ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में ऐसे हालात देखने को मिलेंगे.
दमन के बजाय बातचीत से समाधान निकाले सरकार
विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने में असमर्थता जताते हुए वांगचुक ने प्रसिद्ध शायर फैज अहमद फैज के शेरों का सहारा लिया और सभी राजनीतिक व युवा कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील की. उन्होंने विशेष रूप से 'जनरेशन जेड' (Gen Z) के युवाओं से हर कीमत पर शांति बनाए रखने का आग्रह किया और कहा कि बापू का अहिंसा का मार्ग ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है. इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस गंभीर मुद्दे का समाधान दमन के बजाय बातचीत के जरिए निकालेगी.
अनशन करने की दी चेतावनी
नेताओं की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही वांगचुक ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि हिरासत में लिए गए सभी लोगों को 24 घंटे के अंदर रिहा नहीं किया गया, तो वे एक बार फिर 'अनशन' या 'पदयात्रा' शुरू करने के लिए मजबूर होंगे.
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उल्लेखनीय है कि इससे पहले जून में नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर उन्होंने जंतर-मंतर पर 21 दिनों तक लंबा अनशन किया था, जिसके बाद 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था.