80 साल के बुजुर्ग को एक पेड़ के बदले 21 पेड़ लगाने का दिया आदेश, HC ने सरकार को लगाई कड़ी फटकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने 80 वर्षीय बुजुर्ग को गिरे हुए नीम के पेड़ के बदले 21 पेड़ लगाने के वन विभाग के आदेश पर रोक लगाते हुए सरकार को कड़ी फटकार लगाई है.
दिल्ली के रोहिणी निवासी 80 वर्षीय गुरमेल सिंह भाटिया ने 1991 में अपने घर के बाहर नीम का एक पौधा लगाया था. सेवानिवृत्त प्रथम श्रेणी अधिकारी भाटिया ने करीब 35 वर्षों तक इस पेड़ की देखभाल की. हालांकि, मई 2024 में आई 77 किमी/घंटे की रफ्तार वाली आंधी में यह पेड़ उखड़ गया और बिजली के तारों पर लटक गया. भाटिया ने इसकी शिकायत एमसीडी (MCD) से की, जिसने दो महीने बाद आकर पेड़ के हिस्से को हटा दिया. बाद में, पारिवारिक संपत्ति विवाद के चलते उनके बेटे ने उन पर पेड़ अवैध रूप से काटने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करा दी.
वन विभाग का अजीबोगरीब आदेश
शिकायत के बाद वन विभाग के ट्री ऑफिसर ने भाटिया के खिलाफ कार्यवाही शुरू की. अगस्त में जारी आदेश में विभाग ने उन्हें दोषी मानते हुए आसपास के क्षेत्र में 20 लंबे पौधे और मूल स्थान पर 1 अतिरिक्त पौधा लगाने का निर्देश दिया. इतना ही नहीं, आदेश में यह भी शर्त रखी गई कि पौधे कम से कम छह फीट लंबे होने चाहिए और भाटिया को अगले सात वर्षों तक उनके रख-रखाव, सिंचाई और जीवित रहने की पूरी जिम्मेदारी उठानी होगी. बुजुर्ग ने अपनी उम्र और गिरते स्वास्थ्य का हवाला दिया, लेकिन विभाग ने उनकी बात नहीं सुनी.
दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई कड़ी फटकार
वन विभाग के इस आदेश के खिलाफ बुजुर्ग ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुनवाई के दौरान जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने वन विभाग के आदेश पर तुरंत रोक लगा दी और दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई. अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, 'आप ऐसा आदेश कैसे पारित कर सकते हैं? आप कोई अदालत नहीं हैं. यदि कोई पेड़ नहीं लगाना चाहता तो आप उससे जबर्दस्ती कैसे करा सकते हैं?' इसके साथ ही हाईकोर्ट ने दिल्ली प्रेजर्वेशन ऑफ ट्रीज (DPT) एक्ट की रूपरेखा पर सवाल उठाते हुए इसे बेहद खराब तरीके से ड्राफ्ट किया गया कानून करार दिया.
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वन विभाग ने दिया कानूनी तर्क
कोर्ट में डिप्टी फॉरेस्ट कंजर्वेटर ने 'दिल्ली प्रेजर्वेशन ऑफ ट्रीज एक्ट' की धारा 31 का हवाला देते हुए अपने फैसले का बचाव किया. उन्होंने तर्क दिया कि यह धारा ट्री ऑफिसर्स को अर्ध-न्यायिक (quasi-judicial) अधिकार देती है, जिसके तहत वैकल्पिक पौधरोपण के निर्देश दिए जा सकते हैं. धारा 24 के तहत आदेश का पालन न करने पर जुर्माने का भी प्रावधान है. हालांकि, हाईकोर्ट इस तर्क से कतई सहमत नहीं हुआ और वन विभाग से इस पूरे मामले पर जवाब तलब किया है.