एक महीना, 17 मौतें और अनसुलझे सवाल, दिल्ली के आशा किरण शेल्टर होम में हुआ क्या है?

दिल्ली के रोहिणी इलाके के एक आशा किरण होम में जनवरी से अब तक कुल 14 बच्चों की मौत हो चुकी है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उनकी मौत कुपोषण की वजह से हुई है. यहां रह रहे बच्चों का स्वास्थ्य खराब था, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई है. ये बच्चे मानसिक रूप से बीमार थे. आशा किरण में हुई मौतें पर अब जमकर सियासत हो रही है.

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दिल्ली के आशा किरण गृह में महज एक महीने के भीतर 14 मौतों की वजह से हड़कंप मच गया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कहना है कि एक महीने में 17 मौतें हुई हैं. मानसिक रूप से बीमार बच्चों के लिए बनाया गया यह शेल्टर होम रोहिणी में है. एक बच्चा और 6 महिलाओं ने यहां जान गंवाई है. बीते सप्ताह एक जांच आयोग बनाया गया था. मौतों के आंकड़े जनवरी से अब तक, हैरान करने वाले हैं. जनवरी में 3, फरवरी में 2, मार्च में 1 और अप्रैल में तीन मौतें हुई हैं. जून और जुलाई में अचानक ये मामले बेहद तेजी से बढ़ने लगे. 

जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें से ज्यादातर की उम्र महज 20 से 30 साल के बीच की है. मृतकों में किसी को फेफड़े का संक्रमण था, किसी को टीबी था तो किसी को निमोनिया था. दो मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आनी बाकी है. 

दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को इन मौतों पर एक न्यायिक जांच का आदेश दिया है. रोहिणी के आशा किरण होम को लेकर कई खबरें सामने आई हैं, जिनमें दावा किया गया है कि यहां कुछ लापरवाही हुई है. मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिए बनाए गए इस शेल्टर होम में अचानक 14 मौतें होने की वजह से हड़कंप मच गया है.

दिल्ली सरकार ने मांगी सबमिशन रिपोर्ट

दिल्ली की मंत्री आतिशी ने 48 घंटों के अंदर सबमिशन रिपोर्ट मांगी है और जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने भविष्य में ऐसी मौतें न हों इसे लेकर सुझाव भी मांगा है. मंत्री ने पूरे प्रशासन को इस मामले में तलब किया है. इसे विपक्ष एक बड़े मुद्दे की तरह भुना रहा है. दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आशा किरण चलाया जाता है. 

दशकों से मौत को लेकर उठ रहे सवाल

दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग ने आशा किरण की स्थापना साल 1989 में की थी. इसकी कुल क्षमता 35 लोगों की है. इस शेल्टर होम को लेकर जमकर हंगामा होता है. दशकों से मौतों को लेकर सवाल उठते रहे हैं. मुख्य सचिव नरेश कुमार को दिल्ली सरकार ने आदेश दिया है कि यज जांच कराएं कि कैसे 14 मौतें हुई हैं. 

दिल्ली की मंत्री आतिशी ने अपने आदेश में क्या कहा है?

आतिशी ने अपने आदेश में कहा है कि सरकार ऐसी खामियों को बर्दाश्त नहीं करेगी. यह एक बेहद संगीन मुद्दा है. इसकी छानबीन की जानी चाहिए. ऐसी जगहों में सही काम होना चाहिए था, जिसके ठीक उलट काम किया गया है. सभी शेल्टर होम्स को अच्छी सुविधाएं देनी चाहिए. 

शेल्टर होम में हो रही मौतों पर 2014 से ही उठ ररहे सवाल

साल 2015 में करीब 51 मौतें हुई थीं. 59 मौतें साल 2005 में हुई थीं. साल 2015 में CAG ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ये शेल्टर होम हद से ज्यादा लोगों से भरे हुए हैं. यहां सुविधाएं बहुत कम हैं. मेडिकल इमरजेंसी में खामियां हैं और स्टाफ की किल्लत है.

बीजेपी का आरोप- बच्चों को नहीं मिल रहा खाना, दिया जा रहा गंदा पानी 

बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को कहा, 'दिल्ली सरकार के आशा किरण शेल्टर होम में दिव्यांग लोगों को रखा जाता है, उनकी देखभाल की जाती है. इस शेल्टर होम में लगातार मौतें हो रही हैं. साल 2024 में 27 लोगों ने जान गंवा दी है. जुलाई में ही 17 लोगों जान गंवा दी है. प्रशासन वजह नहीं बता रहा है. एसडीएम जांच में क्या है, ये भी हमें नहीं पता है. अधिकारी गेट बंद कर बैठे हैं, किसी को अंदर जाने नहीं दे रहे हैं. बच्चों को गंदा पानी मिल रहा है, उन्हें खाना नहीं दिया जाता है. उन्हें इलाज नहीं मिलता है. इसमें जो लोग शामिल हैं, उन्हें सजा भी मिलनी चाहिए.