असम विधानसभा चुनाव: राज्य में 126 सीटों के लिए कब होगी वोटिंग, चुनाव आयोग ने जारी किया पूरा शेड्यूल

चुनाव आयोग ने असम विधानसभा चुनाव 2026 की तारीख घोषित कर दी है. राज्य की 126 सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदान होगा. पूरा चुनाव कार्यक्रम 6 मई तक समाप्त किया जाएगा और सुरक्षा के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है.

Anuj

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने असम विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार शाम 4 बजे आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी.

घोषणा के अनुसार, राज्य की 126 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल 2026 को मतदान कराया जाएगा. वर्तमान असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई 2026 को समाप्त हो रहा है.

बोहाग बिहू को ध्यान में रखकर तारीखों का ऐलान

चुनाव आयोग ने चुनाव कार्यक्रम तैयार करते समय राज्य के प्रमुख त्योहार बोहाग बिहू को ध्यान में रखा है. आयोग का उद्देश्य है कि मतदान और उससे जुड़ी सभी प्रक्रियाएं इस त्योहार से पहले पूरी हो जाए. इसी वजह से चुनाव प्रक्रिया अप्रैल की शुरुआत में आयोजित की जा रही है, ताकि त्योहार के दौरान किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा न आए.

16 मार्च को राजपत्र अधिसूचना जारी

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 16 मार्च 2026 को राजपत्र अधिसूचना जारी की जाएगी. उम्मीदवार 23 मार्च तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे. नामांकन पत्रों की जांच 24 मार्च को होगी, जबकि 26 मार्च तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं. 9 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा और मतगणना 4 मई 2026 को होगी. आयोग के अनुसार, पूरी चुनाव प्रक्रिया 6 मई 2026 तक समाप्त कर दी जाएगी.

सुरक्षा व्यवस्था के लिए नई रणनीति

2026 के चुनाव को देखते हुए आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई निगरानी प्रणाली लागू की है. इसके तहत चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षकों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की तैनाती और आवाजाही पर अंतिम अधिकार दिया गया है. यह व्यवस्था दो चरणों में सुरक्षा बलों की तैनाती सुनिश्चित करेगी, जिससे राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों में बेहतर नियंत्रण रखा जा सके.

आचार सहिंता हुई लागू

ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ राज्य में आचार सहिंता लागू कर दी गई है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग ने कई बड़े कदम उठाए हैं और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा है जिसके तहत प्रत्येक पात्र मतदाता को मतदाता सूची में बनाए रखने और अपात्र मतदाता को मतदाता सूची से बाहर करने की कोशिश की गई है.