नई दिल्ली: पर्यटन की तस्वीर लंबे समय से खूबसूरत पहाड़ों, समुद्र, ऐतिहासिक इमारतों और नई संस्कृतियों से जुड़ी रही है. लेकिन अब घूमने की पसंद में एक ऐसा पहलू भी दिखाई दे रहा है, जो मौत, अपराध, युद्ध, हादसे और मानवीय त्रासदियों से जुड़ा है. ऐसी जगहों पर जाने की प्रवृत्ति को डार्क टूरिज्म कहा जाता है. भारत में भी कुछ चर्चित घटनाओं के बाद इन स्थानों को लेकर लोगों की जिज्ञासा बढ़ती दिखाई दे रही है.
महाराष्ट्र के पुणे का लोहागढ़ किला इसका हालिया उदाहरण है. यह किला मराठा इतिहास और ट्रेकिंग के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद यहां आने वाले कुछ पर्यटक कथित अपराध स्थल के बारे में भी सवाल करने लगे हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लोग गाइड से उस जगह के बारे में पूछ रहे हैं, जहां कथित तौर पर घटना हुई थी. स्थानीय स्तर पर उस स्थान को ‘सिया स्पॉट’ कहा जाने लगा है.
डार्क टूरिज्म या ब्लैक टूरिज्म ऐसी जगहों की यात्रा को कहा जाता है, जिनका संबंध मौत, अपराध, युद्ध, प्राकृतिक आपदा या किसी बड़े मानवीय दुख से रहा हो. इसका एक चर्चित उदाहरण जापान के हिरोशिमा और नागासाकी हैं. इन शहरों पर परमाणु बम गिराए गए थे. घटना के करीब 80 साल बाद भी ये स्थान उस इतिहास को समझने के लिए लोगों को आकर्षित करते हैं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यहां हर साल करीब 20 लाख पर्यटकों के पहुंचने का दावा किया जाता है.
लोहागढ़ किला आमतौर पर अपने इतिहास, वास्तुकला और ट्रेकिंग रूट के लिए पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है. लेकिन केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद यहां आने वाले कुछ लोगों की रुचि घटना से जुड़ी जगह को लेकर भी बढ़ी है. मीडिया रिपोर्टों में किले में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की बात सामने आई है. इसी वजह से गाइडों से इतिहास के साथ-साथ कथित अपराध स्थल के बारे में भी सवाल किए जाने की चर्चा है. यही बदलाव डार्क टूरिज्म की ओर इशारा करता है.
यह प्रवृत्ति केवल लोहागढ़ तक सीमित नहीं है. मेघालय के चर्चित हनीमून कांड के बाद चेरापूंजी की उस घाटी को लेकर भी पर्यटकों में जिज्ञासा देखी गई, जहां इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की कथित हत्या की गई थी. इसी तरह 2024 में वायनाड में भूस्खलन के बाद केरल पुलिस को लोगों से अपील करनी पड़ी थी कि वे त्रासदी वाले क्षेत्रों में साइटसीइंग के लिए न जाएं. वजह यह थी कि ऐसे लोगों की आवाजाही राहत और बचाव कार्यों में परेशानी पैदा कर सकती थी.
डार्क टूरिज्म के पीछे सिर्फ रोमांच नहीं होता. कुछ लोग किसी घटना को करीब से समझना चाहते हैं, तो कुछ उसके असर और वास्तविक परिस्थितियों को महसूस करने की कोशिश करते हैं. कई बार इंटरनेट मीडिया भी ऐसी घटनाओं को लगातार चर्चा में रखता है. ट्रू क्राइम डॉक्यूमेंट्री, पॉडकास्ट, किताबें और वेब सीरीज वास्तविक अपराधों के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ाते हैं. इसके बाद कुछ लोगों में उस घटना की वास्तविक जगह देखने की इच्छा भी पैदा हो सकती है.
द कन्वर्सेशन की रिपोर्ट के अनुसार, किसी ताजा अपराध स्थल पर केवल कौतूहल के कारण पहुंचना डार्क टूरिज्म का सबसे विवादित रूप माना जाता है. हालांकि इसका दायरा काफी बड़ा है. यह सांस्कृतिक अपराध-विज्ञान से भी जुड़ा विषय है, जिसमें देखा जाता है कि समाज अपराध और हिंसा को किस तरह समझता है. किसी त्रासदी वाली जगह पर जाना कभी इतिहास समझने का प्रयास हो सकता है, लेकिन पीड़ितों और उनके परिवारों की भावनाओं का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है.