कॉकरोच जनता पार्टी विवाद: CJP मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका, एफआईआर और CBI जांच की मांग

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. याचिका में फर्जी डिग्री, सुप्रीम कोर्ट की पहचान के दुरुपयोग और सोशल मीडिया अभियान की CBI जांच की मांग की गई है. केंद्र सरकार पहले ही CJP का X हैंडल भारत में ब्लॉक कर चुकी है.

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Dhiraj Kumar Dhillon

करीब एक सप्ताह से सोशल मी‌डिया से लेकर चौपालों तक की चर्चा पर कब्जा जमाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की मुश्किलें अब बढ़ती दिखने लगी हैं. इस मामले को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत में एक याचिका दायर की गई है. याचिका में मांग की गई है कि इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज कर सीबीआई जांच कराई जाए. सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर देने वाले कौन लोग हैं? इनका क्या मकसद है? सीबीआई इसकी स्वतंत्र रूप से जांच करे. 

सुप्रीम कोर्ट की पहचान के दुरुपयोग के भी आरोप

याचिका में फर्जी कानूनी डिग्रियों के इस्तेमाल और सुप्रीम कोर्ट की पहचान के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं. याचिका में कहा गया है कि फर्जी डिग्री के सहारे लोग स्वयंभू वकील और कानून के जानकार बनकर बैठ गए और भोले-भाले लोगों को गुमराह करने के साथ ही देश की न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने का काम किया. याचिका में मांग की गई है कि फर्जी डिग्रियों के उपयोग और आपराधिक साजिश की जांच करने के निर्देश सीबीआई को दिए जाएं.

विवाद बढ़ने पर भारत सरकार ने प्रतिबंधित किया एक्स हैंडल

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की व्यवस्था पर हमला करने वालों पर की गई टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर विवाद चरम पर पहुंच गया. हालांकि उस टिप्पणी को लेकर सीजेआई की ओर पूरे प्रकरण को स्पष्ट भी किया गया था लेकिन विवाद बढ़ता गया और स्थिति यह हो गई कि आईबी की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार के निर्देश के बाद सीजेपी का एक्स हैंडल भारत में बंद कर दिया गया. भारत सरकार के सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय की ओर से अधिनियम की धारा 69 के के अंतर्गत एक्स हैंडल प्रतिबंधित करने की कार्रवाई की गई. 

कॉकरोच जनता पार्टी के बारे में जानिए

कॉकरोच जनता पार्टी दरअसल कोई राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि व्यंग्य के अंदाज में सोशल मीडिया पर चलाया गया एक डिजिटल अभियान है. खुफिया एजेंसियों ने इस भड़काऊ और देश की संप्रभुता ‌को चुनौती देने वाला बताया है. कॉकरोज जनता पार्टी की शुरूआत बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे महाराष्ट्र मूल के छात्र अभिजीत दिपके ने शुरू किया और इस डिजिटल अभियान को बेरोजगार युवाओं की आवाज बताते हुए एक आंदोलन खड़ा करने का प्रयास किया.