'इसमें गलत क्या है...', पत्नी को अवैध रूप से ट्रांसफर की गई जमीन के आरोपों पर बोले सिद्धारमैया

कर्नाटक बीजेपी ने मंगलवार को आरोप लगाया है कि मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने सीएम सिद्धारमैया की पत्नी को अवैध रूप से जमीन ट्रांसफर की है. साथ ही बीजेपी ने यह भी कहा कि सरकार प्राधिकरण के अधिकारियों को बचाने में लगी हुई है. अधिकारियों को निलंबित करने के बजाय उनका ट्रांसफर कर दिया गया. बीजेपी नेता आर अशोक ने कहा कि यह काम सीएम की जानकारी के बिना कैसे हो सकता है.

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मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सोमवार को चार अधिकारियों के तबादले के एक दिन बाद कर्नाटक बीजेपी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी को प्राधिकरण द्वारा 'अवैध रूप से' वैकल्पिक भूमि आवंटित की गई है. वहीं इन आरोपों का खंडन करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि उनकी पत्नी पार्वती द्वारा खोई गई जमीन के लिए वैकल्पिक जमीन पिछली बीजेपी सरकार द्वारा आवंटित की गई थी, जिसने “50:50 अनुपात” योजना शुरू की थी.

'इसमें गलत क्या है'

सिद्धारमैया ने कहा, 'इसमें गलत क्या है. यह भूमि रिंग रोड के बगल में स्थित है. इस 3.16 एकड़ भूमि को मूल रूप से उनके ससुर मल्लिकार्जुन ने खरीदा था और बाद उन्होंने उसे मेरी पत्नी को उपहार के रूप में दे दिया.' उन्होंने कहा कि मुडा ने हमें हमारी खोई हुई जमीन के बदले उसी कीमत की जमीन दी है क्या हमें हमारी जमीन नहीं मिलनी चाहिए थी?

विपक्ष के नेता ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
विपक्ष के नेता आर अशोक ने MUDA में कथित 4000 करोड़ की अनियमितताओं की बात कहते हुए सरकार पर कथित अनियमितताओं में शामिल अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों को निलंबित करने के बजाय सरकार ने उनका तबादला कर दिया है. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "क्या आपके गृह जिले (मैसूर) में इतना बड़ा घोटाला आपकी जानकारी के बिना और आपकी भागीदारी के बिना हो सकता है?"

डिप्टी सीएम ने किया अनियमितता से इनकार
वहीं सीएम सिद्धारमैया का बचाव करते हुए उनके डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने मुडा में किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया की पत्नी को यह जगह इसलिए मिली क्योंकि वह (50:50) योजना के तहत पात्र थीं.

MUDA ने 50:50 के अनुपात में लेआउट विकसित करने के बाद भूमि खोने वालों को वैकल्पिक साइटें वितरित कीं. इस लेआउट में 50% साइटें भूमि खोने वालों को मिलीं. एक सरकारी आदेश में कहा गया है कि साइटों के विकास के लिए उन लोगों को कई साइटें वितरित की गईं जिन्होंने भूमि नहीं खोई. आदेश में कहा गया है कि पिछले दो वर्षों में विजयनगर, दत्तगल्ली, जेपी नगर और आरटी नगर जैसे क्षेत्रों में 3,000 से अधिक वैकल्पिक स्थल आवंटित किए गए थे जहां भूमि का मूल्य उन क्षेत्रों की तुलना में अधिक था जहां MUDA ने लेआउट विकसित किए थे.

आरोपों की जांच के लिए कमेटी गठित
शहरी विकास एवं नगर नियोजन मंत्री बिरथी सुरेश ने आरोपों की जांच के लिए शहरी प्राधिकरण आयुक्त आर वेंकटचलपति की अध्यक्षता में एक पैनल का गठन किया है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पैनल को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. सोमवार को समीक्षा बैठक के बाद सुरेश ने कहा कि सरकार ने पिछले आठ महीनों में MUDA को दो आदेश जारी किए हैं, जिसमें विभाग के विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने तक योजना के तहत साइट आवंटन को रद्द करने के लिए कहा गया है. हालांकि आरोपों में कहा गया है आवंटन अभी भी जारी है, हम इसकी जांच कर रहे हैं.