CJP का बड़ा फैसला, 5 सितंबर को नहीं निकलेगा मार्च! जानिए क्यों बदला पूरा प्लान

केंद्र के आश्वासन और FIR वापस लेने की जानकारी के बाद CJP ने 5 सितंबर का इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक प्रस्तावित मार्च रद्द कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने फैसले का स्वागत किया.

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Meenu Singh

CJP के 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध मार्च पर विराम लग गया है. केंद्र सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दिए जाने के बाद संगठन ने मार्च रद्द करने का फैसला किया. CJP ने अदालत के आदेश और सरकार के आश्वासन को देखते हुए यह कदम उठाया. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने संगठन के फैसले की सराहना की और कहा कि आपसी भरोसे से मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिए संभव है. अब आंदोलन को लेकर अगली रणनीति पर नजर है.

FIR वापस लेने पर बनी सहमति

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र के साथ बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र ने छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी FIR वापस लेने के लिए आवेदन दिए हैं. सरकार ने यह भी कहा कि 20 से 25 जुलाई की घटनाओं को लेकर आगे नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी. इसके अलावा NEET आत्महत्या पीड़ितों के परिवारों के मुआवजे के लिए तीन महीने में नीति तैयार करने की जानकारी भी अदालत को दी गई.


सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप

CJP ने आरोप लगाया था कि 25 जुलाई को सरकार की ओर से किए गए आश्वासन पूरे नहीं हुए. इन्हीं वादों के आधार पर संगठन ने अपना एक महीने से ज्यादा चला आंदोलन खत्म किया था. बाद में संगठन ने 5 सितंबर को मार्च निकालने का फैसला किया था. इस मार्च में मृत छात्रों के परिवारों के शामिल होने की योजना थी. हालांकि, सरकार की नई जानकारी और अदालत के आदेश के बाद संगठन ने अपना निर्णय बदल दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले की सराहना की

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मार्च वापस लेने के सीजेपी के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की ओर से भरोसा कायम रखा जाए तो समस्याओं को धीरे-धीरे सुलझाया जा सकता है. अदालत ने बातचीत और खुले मन से समाधान खोजने पर जोर दिया. सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने भी कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और सरकार के आश्वासन को देखते हुए मार्च वापस लेना उचित समझा गया.

सोनम वांगचुक ने राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर बात की

सोनम वांगचुक ने सीजेपी से जुड़े युवा नेताओं और अभिजीत दिपके को लेकर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का पहले किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होना अपने आप में गलत नहीं है. वांगचुक के मुताबिक, इन युवाओं में राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हो सकती हैं और इसमें कुछ असामान्य नहीं है. उन्होंने कहा कि युवा नेताओं से यह उम्मीद करना ठीक नहीं कि वे निजी या राजनीतिक लक्ष्य बिल्कुल न रखें.