क्या राजनीति में उतरेंगे अभिजीत दिपके? CJP संस्थापक ने बताया आगे का पूरा प्लान
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि उनका उद्देश्य चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि जनदबाव के जरिए व्यवस्था में बदलाव लाना है. उन्होंने शिक्षा सुधार, लोकतांत्रिक आंदोलन और संगठन के भविष्य पर अपनी रणनीति साझा की.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा है कि उनकी प्राथमिकता चुनावी राजनीति नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाना है. उन्होंने कहा कि वे सांसद या विधायक बनने की इच्छा नहीं रखते. इसके बजाय अपने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले स्थित गांव सांतुक पिंपरी के सरपंच बनकर शिक्षा, सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार करना चाहते हैं.
किसी दल के विरोध में नहीं
एक समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में दिपके ने स्पष्ट किया कि उनका संगठन किसी विशेष राजनीतिक दल के विरोध में नहीं, बल्कि व्यवस्था की कमियों के खिलाफ काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि जहां भी छात्रों और शिक्षा से जुड़े मुद्दे सामने आएंगे, CJP वहां सक्रिय भूमिका निभाएगी. उनके अनुसार, शिक्षा संकट केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशव्यापी चुनौती बन चुका है और छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए.
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डिग्री विवाद पर दी सफाई
दिपके ने अपनी शिक्षा को लेकर उठे सवालों पर कहा कि वे अपनी छात्रवृत्ति और शिक्षा ऋण से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने को तैयार हैं. साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री से भी अपनी शैक्षणिक डिग्री सार्वजनिक करने की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की आलोचना करने वालों पर जांच एजेंसियों के जरिए दबाव बनाया जाता है. हालांकि, इन आरोपों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
5 अगस्त की बैठक में तय होगी आगे की दिशा
CJP के भविष्य को लेकर दिपके ने बताया कि 5 अगस्त को उनके आवास पर संगठन की कोर कमेटी और प्रवक्ताओं की महत्वपूर्ण बैठक होगी. इसमें आंदोलन के अनुभवों की समीक्षा, स्वयंसेवकों से सुझाव और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की जाएगी. उन्होंने बताया कि आंदोलन की शुरुआत 10-20 लोगों से हुई थी, लेकिन अब 300 से अधिक स्वयंसेवक इससे जुड़ चुके हैं. उनका कहना है कि संगठन सामूहिक निर्णय के आधार पर आगे की दिशा तय करेगा.