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India Daily

नई संसद बन गई, गांवों के स्कूल कब बनेंगे? CJP ने उठाया बड़ा सवाल, शुरू की ‘School Thik Karo’ मुहिम

कॉकरोच जनता पार्टी ने स्वतंत्रता दिवस पर ‘School Thik Karo’ अभियान शुरू करने का ऐलान किया है जिसका लक्ष्य ग्रामीण सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी दूर करना है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
नई संसद बन गई, गांवों के स्कूल कब बनेंगे? CJP ने उठाया बड़ा सवाल, शुरू की ‘School Thik Karo’ मुहिम
Courtesy: CJP

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए नए अभियान की घोषणा की है. ‘School Thik Karo’ नाम की यह मुहिम स्वतंत्रता दिवस पर शुरू की जाएगी. पार्टी का कहना है कि इसका उद्देश्य गांवों के स्कूलों में वर्षों से नजरअंदाज की जा रही बुनियादी जरूरतों को सामने लाना है.

ग्रामीण बच्चों के सवाल पर जोर

अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी गांवों के बच्चों को स्कूल में जरूरी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. उन्होंने ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि अभियान के जरिए सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने और सुधार की दिशा में काम करने की कोशिश की जाएगी.

हमीरपुर के बच्चों के प्रदर्शन से जुड़ी मुहिम

इस घोषणा के बीच उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में चांदपुर गांव के स्कूली बच्चों का प्रदर्शन भी चर्चा में है. सैकड़ों बच्चे अपने अभिभावकों और ग्रामीणों के साथ जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और स्कूल तक जाने वाली उचित सड़क की मांग की. दिपके ने बच्चों के आंदोलन का समर्थन करते हुए इसे उनके भविष्य की लड़ाई बताया.

स्कूलों का सोशल ऑडिट होगा

CJP के मुताबिक ‘School Thik Karo’ के तहत अभिभावक सरकारी स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का सामाजिक ऑडिट करेंगे. इसके बाद कमियों की जानकारी स्थानीय स्तर पर सामने लाई जाएगी. पार्टी ग्राम प्रधानों से भी स्कूलों की स्थिति सुधारने और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पहल करने की अपील करेगी.

महाराष्ट्र के गांव से होगी शुरुआत

अभिजीत दिपके ने बताया कि अभियान की शुरुआत उनके गांव से की जाएगी. इसके बाद CJP दूसरे गांवों के स्कूलों तक पहुंचने की योजना बना रही है. उनका कहना है कि ग्रामीण शिक्षा ढांचे की अनदेखी को अब स्थानीय समुदाय की भागीदारी से चुनौती देने की जरूरत है.

नई इमारतों पर उठाया सवाल

दिपके ने सरकारों की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में नई संसद और नया प्रधानमंत्री आवास बनाया जा सकता है, लेकिन गांवों में बेहतर स्कूल बनाने में इतनी मुश्किल क्यों आती है. उन्होंने पूछा कि क्या किसानों और मजदूरों के बच्चों को देश का भविष्य नहीं माना जाना चाहिए.

‘शिक्षा क्रांति’ का दावा

CJP के प्रवक्ता और सह-संयोजक सौरव दास ने भी अभियान का समर्थन किया. उन्होंने सरकारी स्कूलों की अनदेखी को अस्वीकार्य बताते हुए उन्हें सुधारने की जरूरत पर जोर दिया. पार्टी का कहना है कि नई पीढ़ी की भागीदारी से ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मुहिम को गति दी जा सकती है.