ऑपरेशन सिंदूर के बाद Rafale की बिक्री रोकने के लिए चीन ने किया था दुष्प्रचार, अमेरिकी रिपोर्ट में हुआ 'ड्रैगन' की चाल का खुलासा
अमेरिकी आयोग ने रिपोर्ट में खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन ने जे-35 विमानों के पक्ष में फ्रांसीसी राफेल की बिक्री रोकने के लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स और एआई तस्वीरों के जरिए दुष्प्रचार किया.
नई दिल्ली: अमेरिकी कांग्रेस के सलाहकार आयोग 'यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्यूरिटी रिव्यू कमीशन' ने मंगलवार को एक नई रिपोर्ट में चीन पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन ने सोशल मीडिया और एआई तकनीक का इस्तेमाल कर भारत और फ्रांस के राफेल विमानों के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाया. आयोग ने बताया कि चीन ने अपने जे-35 विमानों को बढ़ावा देने के लिए फर्जी अकाउंट्स के माध्यम से विमानों के कथित मलबे की तस्वीरें साझा कीं.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन का दुष्प्रचार
अमेरिकी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया कि चीन ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपने जे-35 विमानों को बढ़ावा देने के लिए एक सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान चलाया. इसमें फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स का इस्तेमाल किया गया और एआई की मदद से विमानों के कथित मलबे की तस्वीरें प्रचारित की गईं. आयोग ने कहा कि यह कदम विशेष रूप से फ्रांस के राफेल विमानों की बिक्री में बाधा डालने के उद्देश्य से उठाया गया था.
सोशल मीडिया और एआई का इस्तेमाल
रिपोर्ट में बताया गया कि चीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी अकाउंट्स बनाकर अपने दुष्प्रचार को व्यापक बनाया. इन अकाउंट्स ने दावा किया कि भारत और अन्य देशों के विमान चीन के हथियारों से नष्ट हो चुके हैं. एआई तकनीक की मदद से निर्मित तस्वीरों ने यह भ्रम फैलाया कि चीन के हथियार अत्याधुनिक हैं और इनके मुकाबले अन्य विमानों की शक्ति कमजोर है.
मई संघर्ष का 'अवसरवादी' इस्तेमाल
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि चीन ने मई में हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष का भी 'अवसरवादी' तरीके से इस्तेमाल किया. इस दौरान उसने अपनी परिष्कृत हथियार तकनीक का प्रचार कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने विमानों की ताकत दिखाने की कोशिश की. आयोग ने कहा कि यह रणनीति चीन की ग्रे-जोन गतिविधियों का हिस्सा है.
सीमा विवाद पर वार्ता का लाभ
आयोग ने भारत-चीन संबंधों की स्थिति का विश्लेषण करते हुए कहा कि सीमा मुद्दों के समाधान में दोनों देशों के दृष्टिकोण में असमानता है. चीन आंशिक समाधान और प्रचारित वार्ता का फायदा उठाता है, जबकि भारत स्थायी समाधान चाहता है. आयोग ने जोर दिया कि हाल के वर्षों में भारत ने सीमा पर चीन से उत्पन्न खतरे को गंभीरता से पहचानना शुरू कर दिया है.
आर्थिक सहयोग और भविष्य
रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और सीमा समाधान समझौते ज्यादातर वैचारिक हैं. यह देखना बाकी है कि 2025 की प्रतिबद्धताएं अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता के चलते हैं या द्विपक्षीय संबंधों के सामान्यीकरण का संकेत हैं. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि दलाई लामा दोनों पड़ोसियों के बीच विवाद का विषय बने रह सकते हैं.