चीन बना रहा हाइपरसोनिक ड्रोन नेटवर्क, रडार को भी देगा चकमा

चीन के हाइपरसोनिक तैयारी ड्रोन पर नए शोध के दौरान कई मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहनों (ड्रोन) को एक नेटवर्क में जोड़कर एक साथ कई हमले करने वाले हथियारों की खोज शुरू हो गई है. इस तकनीक का नाम है स्वार्म.

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Gyanendra Sharma

आधुनिक समय में ड्रोन का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है. हर देश में इसका इस्तेमाल हो रहा है. हालांकि, तकनीक की जटिलता के कारण केवल कुछ ही देशों के पास हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं. लेकिन भविष्य में यह और भी आम हो जाएगा. चीन ने दावा किया है कि वह हाइपरसोनिक ड्रोन बनाने में सक्षम है और स्मार्ट झुंड बनाने के लिए इन ड्रोन को नेटवर्क करने पर काम कर रहा है. चीन ने कथित तौर पर अमेरिकी चुनौती के जवाब में यह प्रयास शुरू किया है.

चीन के हाइपरसोनिक तैयारी ड्रोन पर नए शोध के दौरान कई मानवरहित लड़ाकू हवाई वाहनों (ड्रोन) को एक नेटवर्क में जोड़कर एक साथ कई हमले करने वाले हथियारों की खोज शुरू हो गई है . इस तकनीक का नाम है स्वार्म. बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा किए गए शोध में इस स्मार्ट स्वार्म का जिक्र किया गया है. चीनी वैज्ञानिक इसी तरह के स्मार्ट स्वार्म विकसित कर रहे हैं. 

वायुमंडल में ध्वनि से पांच गुना तेज गति से चलने वाले हाइपरसोनिक मानवरहित हवाई वाहनों (यूसीएवी) को एक नेटवर्क से जोड़कर चीन एक स्मार्ट झुंड बनाने की दिशा में काम कर रहा है. एक भी मिसाइल इस बुद्धिमान झुंड जितना खतरनाक नहीं है. बैलिस्टिक मिसाइल से धीमी होने के बावजूद, इस हाइपरसोनिक हथियार को रडार या किसी अन्य तरीके से रोकना चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि इसकी उड़ान कम ऊंचाई पर होगी. इसके अलावा, ये बुद्धिमान झुंड परमाणु हथियार  भी दाग ​​सकते हैं.

अमेरिका भी इसी तरह की परियोजना पर काम कर रहा है

2017 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी MSET या मिसाइल मल्टीपल सिमल्टेनियस एंगेजमेंट टेक्नोलॉजी नामक एक तुलनीय कार्यक्रम शुरू किया. यह कई मिसाइलों को विभिन्न लक्ष्यों पर हमला करने के लिए एक साथ इस्तेमाल करने की अनुमति देता है. विशेषज्ञों का दावा है कि MSET एक हाइपरसोनिक मिसाइल से लैस एक रणनीतिक प्रणाली के बजाय एक छोटे पैमाने की सामरिक प्रणाली है. चीनी वैज्ञानिकों द्वारा एक तुलनीय झुंड, लेकिन हाइपरसोनिक मिसाइलों के साथ, की योजना बनाई जा रही है. 

ड्रोन ने बदला युद्ध का तरीका
 
तकनीकी दृष्टि से भारत भी भविष्य में होने वाले संघर्ष के लिए तैयार हो रहा है. स्वॉर्मिंग तकनीक को भारतीय सेना ने भी अपनाया है . इसी तर्ज पर HAL भी एक अधिक उन्नत, लंबी दूरी की प्रणाली बना रहा है. इस विधि को कॉम्बैट एयर टीम विधि या CATS के नाम से जाना जाता है. इस प्रणाली को एक ही लड़ाकू विमान से नियंत्रित करने के लिए तीन अलग-अलग ड्रोन का इस्तेमाल किया जा सकता है. CATS वॉरियर पहला ड्रोन सिस्टम है; CATS हंटर दूसरा है; और CATS अल्फा तीसरा है. हालांकि भारत हाइपरसोनिक ड्रोन की तैनाती के माध्यम से अपनी तकनीक को बेहतर बनाने और अपनी स्थिति को मजबूत करने के चीन के प्रयासों से भी चिंतित हो सकता है .