Swami Chaitanyananda: दिल्ली के शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट की कई छात्राओं के साथ यौन शोषण का आरोपी स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती को लेकर हर दिन बड़े खुलासे हो रहे हैं. गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच में जो कहानियां आ रही हैं वे फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है. फरारी के दौरान चैतन्यानंद न केवल अपनी पहचान बदलता रहा, बल्कि होटलों में रहने के भी अजीबो-गरीब नियम थोपता था.
आगरा के ताजगंज इलाके में जिस होटल से चैतन्यानंद को गिरफ्तार किया गया, वहां उसने रूम नंबर 101 लिया था. बाबा ने होटल में किसी को आने की अनुमति नहीं दी थी. होटल के हाउसकीपिंग स्टाफ को उसने साफ हिदायत दी थी कि बिना उसकी अनुमति कोई भी कमरे में न घुसे. अगर किसी को आना है तो नहा कर और चप्पल बाहर उतारकर कमरे में आने की अनुमति थी. चैतन्यानंद ने सस्ते होटलों में छिपता था.
UN-ब्रिक्स के फर्जी विजिटिंग कार्ड
होटल रिसेप्शनिस्ट ने बताया कि स्वामी शनिवार शाम 4 बजे पहुंचा था. उसने रूम नंबर 101 बुक किया और सख्त हिदायतें दीं बिना इजाजत कोई कमरे में न घुसे. अगर कोई स्टाफ को अंदर जाना पड़े, तो पहले नहा-धोकर आए, चप्पलें बाहर उतारें. हाउसकीपिंग कर्मचारी इन अजीब नियमों से परेशान थे, लेकिन डर के मारे चुप रहे. स्वामी के पास UN-ब्रिक्स के फर्जी विजिटिंग कार्ड भी बरामद हुए, जो उसके अंतरराष्ट्रीय साजिशों का संकेत देते हैं.
SRISIIM में ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) स्कॉलरशिप पर PGDM कोर्स कर रही छात्राओं को निशाना बनाया गया. आरोप है कि स्वामी चैतन्यानंद ने विदेश यात्रा, अच्छे नौकरी के अवसर और डिग्री पास करने का लालच देकर छात्राओं को अपने जाल में फंसाया. न मानने पर फेल करने की धमकी दी जाती थी. पुलिस ने 32 छात्राओं के बयान दर्ज किए, जिनमें से 17 ने यौन उत्पीड़न की पुष्टि की.
डीन, वार्डन और अन्य स्टाफ स्वामी के पाप को छिपाते थे
जांच में एक 'लेडी गैंग' का पर्दाफाश हुआ. संस्थान की तीन महिलाएं डीन, वार्डन और अन्य स्टाफ स्वामी के सहयोगी बनीं. ये छात्राओं को रात में उसके कमरे बुलाने, अश्लील मैसेज डिलीट करवाने और दबाव बनाने का काम करती थीं. गर्ल्स हॉस्टल में लगे सीक्रेट कैमरों से निगरानी रखी जाती थी, और स्वामी के मोबाइल पर CCTV एक्सेस था. एक पूर्व छात्रा ने बताया कि स्वामी गेरुआ वस्त्र, रुद्राक्ष माला और त्रिपुंड लगाकर साधु का भेष बनाता, लेकिन रात के अंधेरे में अपनी असलियत उजागर कर देता.
आरोप लगने के बाद स्वामी ने अपना नाम बदल लिया पार्थ सारथी से चैतन्यानंद सरस्वती. वह फोन का इस्तेमाल न्यूनतम करता, लोकेशन बार-बार शिफ्ट करता. ओडिशा मूल का यह बाबा 12 साल से दिल्ली के आश्रम में रह रहा था. फरारी के दौरान कई सस्ते होटलों में रुका, लेकिन हर जगह साधु का ढोंग जारी रखा. आगरा के ताजगंज इलाके के एक छोटे होटल में 27 सितंबर की देर रात उसे दबोच लिया गया.