बिना इजाजत CBI नहीं कर सकेगी जांच, मांगनी होगी परमिशन, गैर बीजेपी शासित राज्यों की राह पर मध्य प्रदेश
सीबीआई को अब अन्य भाजपा गैर शासित राज्यों में कार्रवाई से पहले मध्य प्रदेश सरकार से लिखित में अनुमति लेनी होगी. ऐसा नहीं है कि मध्य प्रदेश से पहले अधिकतर उन राज्यों में जहां भाजपा की सरकारें नहीं हैं, वहां सीबीआई को कार्रवाई करने से पहले राज्य सरकार की लिखित अनुमति लेनी होती है. एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि सीबीआई को किसी राज्य में कार्रवाई से पहले उसकी अनुमति जरूरी है.
मध्य प्रदेश में राज्य अधिकारियों की जांच के लिए सीबीआई को लिखित सहमति की आवश्यकता होगी. हालांकि, एजेंसी को केंद्र सरकार के कर्मचारियों या निजी व्यक्तियों की जांच के लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी.मध्य प्रदेश सरकार ने कहा है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो को राज्य के अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए उसकी लिखित सहमति की आवश्यकता होगी.
16 जुलाई को इस संबंध में एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था, जिसमें कहा गया कि ये व्यवस्था राज्य में 1 जुलाई से पूर्वव्यापी रूप से लागू हुई है. केंद्रीय जांच ब्यूरो, दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की ओर से शासित है. अधिनियम की धारा 6 के अनुसार, केंद्रीय एजेंसी को अपने अधिकार क्षेत्र में जांच करने के लिए राज्य सरकार से सहमति लेनी होती है.
कहा गया है कि ये सहमति या तो मामला-विशिष्ट या सामान्य हो सकती है. सामान्य सहमति के बिना, केंद्रीय जांच ब्यूरो को किसी भी जांच करने से पहले केस-टू-केस आधार पर राज्य सरकार से संपर्क करना होगा और अनुमति लेनी होगी.
मध्य प्रदेश से पहले इन राज्यों में लागू है ये व्यवस्था
इससे पहले, पश्चिम बंगाल, केरल और पंजाब जैसे कई विपक्षी शासित राज्यों ने केंद्रीय एजेंसी को दी गई अपनी सामान्य सहमति वापस ले ली थी. हालांकि, मध्य प्रदेश ने सामान्य सहमति वापस नहीं ली है, क्योंकि 16 जुलाई की अधिसूचना केवल मध्य प्रदेश सरकार की ओर से नियंत्रित लोक सेवकों से संबंधित है. राज्यों की ओर से सामान्य सहमति वापस लेने के बाद, एक संसदीय पैनल ने 2023 में कहा था कि सीबीआई की स्थिति, कार्यों और शक्तियों को परिभाषित करने के लिए एक नया कानून बनाने की आवश्यकता है.
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि किसी भी अन्य अपराध के लिए सभी पिछली सामान्य सहमति और किसी भी अन्य अपराध के लिए राज्य सरकार द्वारा मामला-दर-मामला आधार पर दी गई सहमति भी लागू रहेगी. आम सहमति आमतौर पर राज्यों की ओर से उनके राज्यों में केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की निर्बाध जांच में सीबीआई की मदद करने के लिए दी जाती है. ये डिफ़ॉल्ट रूप से सहमति है, जिसके अभाव में सीबीआई को हर मामले में राज्य सरकार से आवेदन करना होगा.
क्यों पड़ी इस नोटिफिकेशन की जरूरत?
मध्य प्रदेश गृह विभाग के एक सीनियर अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में मौजूद प्रावधानों में कुछ बदलावों को ध्यान में रखते हुए हमने यह निर्णय लिया है. सीबीआई के साथ हाल ही में हुई चर्चा में ये सलाह दी गई. वैसे भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कोई भी जांच करने के लिए एजेंसियों को अनुमति की आवश्यकता होती है. यह अधिसूचना उसी भावना से जारी की गई है.