हवाई यात्रियों को बड़ी राहत! ATF की कीमतें थामने के लिए सरकार का 10 हजार करोड़ का मास्टरस्ट्रोक, एयरलाइंस को मिलेगा बड़ा सहारा

कैबिनेट ने विमान ईंधन की कीमतों को थामने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के वित्तीय पैकेज को मंजूरी दी है. इस अस्थायी मदद का मुख्य उद्देश्य तेल कंपनियों के घाटे को पाटना और हवाई किराये में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को रोकना है.

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Kuldeep Sharma

नई दिल्ली: आसमान छूते किराये और महंगे सफर से परेशान हवाई यात्रियों और घाटे से जूझ रही एयरलाइंस कंपनियों के लिए आखिरकार केंद्र सरकार एक बड़ी राहत लेकर आई है. अगर आप भी आने वाले दिनों में कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं तो बजट की चिंता थोड़ी कम कर लीजिए क्योंकि सरकार ने विमानों के ईंधन को काबू में रखने के लिए अपना खजाना खोल दिया है.

केंद्रीय कैबिनेट ने भारतीय एयरलाइंस कंपनियों को राहत देने और एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी हवाई ईंधन की कीमतों को थामने के लिए 10000 करोड़ रुपये के एक विशेष पैकेज को मंजूरी दी है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं जिससे एयरलाइंस का पूरा गणित बिगड़ गया है.

सरकारी तेल कंपनियों को दी जाएगी मदद?

इस नई योजना के तहत सरकार इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों को बिना ब्याज के वित्तीय सहायता देगी. इस पैसे का इस्तेमाल जेट ईंधन की वास्तविक बाजार कीमत और एयरलाइंस से ली जाने वाली रियायती दरों के बीच के अंतर को पाटने के लिए किया जाएगा.

सरकार ने साफ किया है कि यह एक अस्थायी व्यवस्था है. जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन के दाम कम होंगे तेल कंपनियां इस अंतर की भरपाई करके पूरा पैसा भारत की संचित निधि में वापस जमा करा देंगी. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से सरकारी तेल कंपनियों को घरेलू बाजार में जेट ईंधन बेचने पर प्रति लीटर लगभग 30 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था. यह नया फंड इस नुकसान की भरपाई करेगा. इस योजना का मुख्य उद्देश्य हवाई ईंधन की कीमतों में स्थिरता लाना है जिससे एयरलाइंस कंपनियां भारी उतार-चढ़ाव के बीच भी अपने खर्चों और उड़ानों का सही तालमेल बिठा सकें.

यात्रियों को मिलेगा फायदा

सरकार का मानना है कि इसका सीधा फायदा आम यात्रियों को भी मिलेगा. ईंधन के दाम काबू में रहने से एयरलाइंस कंपनियां अचानक टिकटों के दाम नहीं बढ़ाएंगी जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें आम जनता की पहुंच में बनी रहेंगी. आपको बता दें कि किसी भी एयरलाइंस के कुल संचालन खर्च में लगभग 40 फीसदी हिस्सा अकेले ईंधन का होता है इसलिए यह फैसला पूरे एविएशन सेक्टर के लिए एक बड़ी संजीवनी साबित हो सकता है.