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'अर्थशास्त्र का हर छात्र स्तब्ध रह गया होगा...', बजट 2026 को लेकर पी चिदंबरम ने वित्त मंत्री पर साधा निशाना

पी चिदंबरम ने कहा कि बजट केवल आय और खर्च का सालाना हिसाब नहीं होता, बल्कि मौजूदा हालात में यह देश की आर्थिक चुनौतियों पर सरकार का नजरिया भी दिखाता है.

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Anuj

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने केंद्रीय बजट को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा कि बजट न तो आर्थिक रणनीति के स्तर पर खरा उतरता है और न ही इसमें किसी तरह की आर्थिक और राजनीतिक दूरदर्शिता दिखाई देती है.

चिदंबरम ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें संदेह है कि सरकार और वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण को पढ़ा भी है या नहीं. अगर पढ़ा है, तो ऐसा लगता है कि उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया.

पी चिदंबरम ने खड़े किए सवाल

पी चिदंबरम ने कहा कि बजट केवल आय और खर्च का सालाना हिसाब नहीं होता, बल्कि मौजूदा हालात में यह देश की आर्थिक चुनौतियों पर सरकार का नजरिया भी दिखाता है. उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में जिन अहम समस्याओं का जिक्र किया गया था, बजट भाषण में उनका कोई स्पष्ट समाधान नजर नहीं आता. उनके मुताबिक, वित्त मंत्री के भाषण को सुनकर अर्थशास्त्र का कोई भी छात्र हैरान रह जाएगा.

देश के सामने बड़ी चुनौतियां

चिदंबरम ने बताया कि देश इस समय कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है. इनमें अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, निजी क्षेत्र का निवेश न करना, सकल स्थिर पूंजी निर्माण का कम स्तर, विदेशी निवेश को लेकर अनिश्चितता, लगातार विदेशी पूंजी का बाहर जाना, बढ़ता राजकोषीय घाटा, लाखों एमएसएमई का बंद होना, युवाओं में बेरोजगारी और शहरी क्षेत्रों में बिगड़ता बुनियादी ढांचा शामिल है. उन्होंने दावा किया कि इन सभी मुद्दों पर बजट भाषण में एक भी ठोस समाधान पेश नहीं किया गया.

वित्त प्रबंधन को बताया कमजोर

पूर्व वित्त मंत्री ने बजट के लेखा-जोखा पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि 2025-26 में राजस्व प्राप्तियां तय अनुमान से काफी कम रही और कुल व्यय में भी भारी कटौती की गई. पूंजीगत व्यय में बड़ी कमी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस कमजोर प्रदर्शन की कोई ठोस वजह सरकार ने नहीं बताई.

योजनाओं की भरमार पर सवाल

चिदंबरम ने कहा कि बजट भाषण की सबसे बड़ी कमी यह है कि वित्त मंत्री लगातार नई योजनाएं और मिशन जोड़ती जा रही हैं. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कम से कम 24 नई घोषणाएं गिनी हैं. उनका कहना था कि इनमें से कितनी योजनाएं अगले साल तक याद भी रहेंगी, यह कहना मुश्किल है.