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'गैंगरेप में मदद करना भी रेप ही है,' बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला, समझिए क्यों है दूसरी अदालतों के लिए नजीर

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सौरभ शर्मा बताते हैं कि गैंगरेप के मामलों में, अगर समूह में कोई व्यक्ति सिर्फ मौजूद ही रहे और किसी तरह से आरोपियों की मदद करे, भले ही वह रेप न करे तो भी उसे रेप का ही दोषी माना जाएगा. बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी अपने फैसले में कहा है कि गैंगरेप के केस में रेप करना ही दोषी नहीं बनाता, अपराधी का सहयोग भी गैंगरेप ही है.

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बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने कहा है कि गैंगरेप के किसी केस में किसी की आरोपी बनाने के लिए रेप करना अनिवार्य नहीं है, बल्कि कोई एक शख्स भी अगर समूह में रेप करता है तो उसे रेप का दोषी माना जाएगा. जस्टिस गोविंद सनप ने 4 पुरुषों की एक याचिका पर यह फैसला सुनाया है. सभी अपीलकर्ताओं ने अपने लिए राहत मांगी थी.

जज ने कहा कि रेप दो लोगों ने किया है और दो लोगों ने लड़की को भागने से रोका है, इसलिए वे भी रेप के दोषी हैं. सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड विशाल अरुण मिश्र बताते हैं कि हर अपराध में, जब अपराधियों की मंशा, एक जैसी हो तो अपराध कोई भी करे, पूरा समूह अपराधी माना जाता है. भारतीय दंड संहिता में इसकी धारा 34 है. इसे कॉमन इंटेंशन के नाम से भी जानते हैं.

'अगर सहेली को न रोकते तो नहीं होता गैंगरेप'

जस्टिस गोविंद सनप ने कहा, 'संदीप और शुभम दोनों आरोपियों ने पीड़िता को पेड़ के पास खींचकर ले आए. बाकी दो आरोपी कुणाल और अशोक ने दोनों ने पीड़िता की सहेली को पकड़ लिया. उन्होंने, सहेली को हिलने-डुलने नहीं दिया. इसलिए मेरी नजर में, यह उनकी मंशा साबित करने के लिए पर्याप्त है. उन्हें सजा नहीं मिलती अगर उन्होंने पीड़िता को बचाने की कोशिश कर रहे दोस्त को न पकड़ा होता.

'गैंगरेप में एक जैसी मंशा ही बनाती है रेप का दोषी, भले न किए हों रेप'

जस्टिस गोविंद ने कहा कि पीड़िता की सहेली अगर आजाद होती तो शायद वह अपनी दोस्त को चीख-पुकारकर बचाने में सक्षम होती. वह आरोपियों को यह जघन्य कृत्य करने से रोक सकती थी. किसी एक आरोपी का ही यौन अपराध करना, दूसरे आरोपियों को गैगंरेप में शामिल मानने के लिए पर्याप्त है. उन सभी की मंशा एक ही थी. जस्टिस गोविंद ने केस पर फैसला सुनाते हुए कहा कि कुणाल और अशोक की हरकत रेप के दायरे में आए में आती है. 

इस वजह से रेप न करने वाले भी हुए गैंगरेप के दोषी 

4 जुलाई को दिए गए आदेश में कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की दोस्त के पास बाइक थी. अगर उसे रोका नहीं जाता तो वह किसी की मदद ले सकती था, गांव के लोगों से इन आरोपियों को हैवानियत से रोकने के लिए मदद मांग पाती कोर्ट ने कहा, 'जब वन रक्षक मौके पर आया और पीड़िता और आकाश ने उसे पूरे मामले के बारे में बताया तब तक देर हो चुकी थी. आरोपी शुभम और संदीप पीड़िता के साथ रेप कर चुके थे. यह कोई आधार नहीं बनता कि कुणाल और अशोक को गैंगरेप के केस में दोषी नहीं माना जा सकता है.

क्या है पूरा केस?

13 जून 2015 को एक लड़की, अपने जिले के एक मंदिर में अपनी सहेली से मिली थी. पूजा के बाद दोनों एक पेड़ के नीचे बैठे थे. तीनों आरोपी मौके पर आए और उसकी सहेली को पकड़ लिया. उन्होंने कहा कि वे वन विभाग के अधिकारी हैं, इसलिए 10,000 रुपये मांग लिए. जब उन्होंने इनकार किया तो उन्होंने इतनी रकम देने से इनकार कर दिया. 

आरोपियों ने उसके साथ रेप कर दिया. आरोपियों ने पीड़िता का फोन छीना, चौथे आरोपी को बुलाया. दोनों को बुरी तरह से पीटा. पीड़िता शौच के लिए गई तो शुभम और संदीप नाम के दो आरोपियों ने उसके साथ रेप कर दिया. कुणाल और अशोक ने पीड़िता के दोस्त को पकड़ लिया. जैसे ही फॉरेस्ट गार्ड मौके पर पहुंचे वे वहां से फरार हो गए.