पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए बीजेपी ने जारी की 144 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट, भवानीपुर से शुभेंदु अधिकारी लड़ेंगे चुनाव

पश्चिम बंगाल में होनेवाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 144 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है. राज्य में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: चुनाव आयोग द्वारा मतदान की तारीखों के ऐलान के बाद भाजपा ने पश्चिम बंगाल में होनेवाले विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की पहली फेहरिस्त जारी कर दी है. इस सूची में कुल 144 नाम शामिल हैं. राज्य में इस बार दो चरणों में वोट डाले जाएंगे. सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच होने वाला यह मुकाबला काफी दिलचस्प और निर्णायक होने की उम्मीद जताई जा रही है.

भाजपा ने अपनी पहली सूची में कई कद्दावर चेहरों पर दांव लगाया है. सबसे चर्चित नाम शुवेंदु अधिकारी का है, जिन्हें पार्टी ने नंदीग्राम और भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीटों से मैदान में उतारा है. वहीं अलीद्वारपुर सुरक्षित सीट से परितोष दास को उम्मीदवार बनाया गया है. पार्टी की यह रणनीति दर्शाती है कि वह ममता बनर्जी के अभेद्य किलों में सीधे सेंध लगाने की तैयारी में है. 

 

दो चरणों में होंगे चुनाव 

पश्चिम बंगाल का यह विधानसभा चुनाव प्रशासनिक और सुरक्षा कारणों से दो मुख्य चरणों में संपन्न कराया जाएगा. चुनाव आयोग ने इसके लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल की तिथियां निर्धारित की हैं. इन दो दिनों में राज्य की जनता ईवीएम के जरिए अपने भविष्य के प्रतिनिधियों का फैसला करेगी. भाजपा ने चुनाव घोषणा के अगले ही दिन उम्मीदवारों का ऐलान कर यह संदेश दिया है कि उनकी चुनावी मशीनरी पूरी तरह सक्रिय है और वे किसी भी चुनौती के लिए तैयार हैं.

नतीजों का बेसब्री से इन्तजार 

मतदान की प्रक्रिया अप्रैल के अंत तक पूरी हो जाएगी. इसके बाद करीब एक हफ्ते का समय मतगणना की प्रशासनिक तैयारी के लिए रखा गया है. चुनाव आयोग के आधिकारिक कैलेंडर के अनुसार, 4 मई को मतों की गिनती की जाएगी और उसी दिन बंगाल का नया मुख्यमंत्री कौन होगा, इसकी तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी. 

टीएमसी और बीजेपी की सीधी टक्कर 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार बंगाल का मुकाबला मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच ही सिमटा रहेगा. भाजपा ने बंगाल की मिट्टी पर अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए बीते कुछ वर्षों में जमीनी स्तर पर व्यापक मेहनत की है. पार्टी का संगठनात्मक ढांचा अब राज्य के सुदूर गांवों तक भी पहुंच चुका है. दूसरी तरफ, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस अपनी लोक-लुभावन योजनाओं के दम पर सत्ता बचाने की पुरजोर कोशिश कर रही है.