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योगी, हिमंत, सुवेंदु पर अपने ही कर रहे हमले, 'कमजोर सरकार' पर आपस में ही लड़ने लगे BJP नेता

BJP Infighting: लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद से कुछ राज्यों में हारे हुए भाजपा प्रत्याशियों ने अपने ही नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जिन नेताओं को हारे हुए प्रत्याशियों ने निशाना बनाना शुरू किया है, उनमें योगी, हिमंत और सुवेंदु जैसे नाम शामिल हैं.

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BJP Infighting: बिहार के काराकाट लोकसभा सीट से हार का सामना करने वाले NDA के प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा न सिर्फ बौखलाए हुए हैं, बल्कि उन्होंने NDA के नेताओं पर उन्हें हराने का आरोप लगा दिया. पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में उपेंद्र कुशवाहा ने सीधे तौर पर कहा कि मुझे क्या, सभी को पता है कि काराकाट में क्या हुआ है, मैं हारा हूं या फिर जानबूझकर हरवाया गया हूं, ये सभी को मालूम है. ऐसा नहीं है कि उपेंद्र कुशवाहा इस तरह का आरोप लगाने वाले पहले नेता हैं. इससे पहले भी BJP के हारे हुए प्रत्याशी ने अपनी ही पार्टी के नेताओं पर सनसनीखेज आरोप लगाए.

दरअसल, उपेंद्र कुशवाहा न सिर्फ काराकाट सीट से हारे हैं, बल्कि वे तीसरे नंबर पर रहे हैं. यहां से वाम दल के राजाराम सिंह ने जीत दर्ज की है, जबकि भोजपुरी स्टार पवन सिंह दूसरे नंबर पर रहे हैं. उन्होंने इशारों में बता दिया कि NDA में उनका साथ धोखा हुआ है. 

उपेंद्र कुशवाहा ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जानबूझकर पवन सिंह को चुनावी मैदान में उतारा. उन्होंने तर्क दिया कि आज का जमाना सोशल मीडिया का है, सभी को सबकुछ पता है. हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा के दावों से उलट NDA नेताओं ने बल्कि खुद नरेंद्र मोदी ने काराकाट में चुनावी सभा को संबोधित किया था. साथ ही निर्दलीय ताल ठोंकने वाले पवन सिंह को भाजपा ने पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया था.

अब बात बंगाल भाजपा की...

पश्चिम बंगाल की बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट से हार के बाद बंगाल भाजपा के सीनियर नेता दिलीप घोष का दर्द छलका. उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी का जिक्र किया और कहा कि पार्टी में कभी पुराने कार्यकर्ता की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए, क्योंकि पुराने कार्यकर्ता ही हमारी जीत की गारंटी होते हैं. नए कार्यकर्ता पर इतनी जल्दी और इतना ज्याादा भरोसा करना ठीक नहीं है.

दरअसल, दिलीप घोष की अगुवाई में ही बंगाल भाजपा ने राज्य में 2019 का आम चुनाव लड़ा था और 18 सीटों पर कब्जा किया था. लेकिन 2021 के बंगाल विधानसभा और 2024 का लोकसभा चुनाव नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में लड़ा गया. परिणाम बेहतर नहीं रहा. सुवेंदु कभी टीएमसी का हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा में शामिल हो गए. माना जा रहा है कि दिलीप घोष ने फेसबुक पर जो कुछ भी लिखा, वो सुवेंदु अधिकारी को ही लेकर लिखा.

2019 में बंगाल की 42 संसदीय सीटों में से 18 पर भाजपा ने जीत हासिल की थी. भाजपा को इस बार अमित शाह ने 30 सीटें जीतने का लक्ष्य दिया था. पार्टी 12 सीटें जीतने में सफल रही. कहा जा रहा है कि 2024 लोकसभा चुनाव में कई सांसदों की सीटों में बदलाव किया गया था. ये दांव बंगाल भाजपा को भारी पड़ा. दावा किया रहा है कि ये दांव सुवेंदु अधिकारी के दिमाग की उपज थी. पार्टी की ओर से जो नाम और सीट दिए गए, उस पर भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति ने हस्ताक्षर कर दिया था. 

असम में क्या हुआ है, क्यों निशाने पर हैं हिमंत?

असम की जोरहाट लोकसभा सीट भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा वाली सीट मानी जाती है. लोकसभा चुनाव 2024 में इस सीट से भाजपा को हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत को भाजपा के भीतर से ही फटकार का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, असम की 14 में 11 लोकसभा सीटों पर भाजपा ने फतह हासिल की है, लेकिन जोरहाट सीट के हारने के बाद किचकिच बढ़ गई है. इस सीट पर खुद हिंमत सरमा ने चुनाव प्रचार की कमान संभाली थी. कहा जा रहा है कि इस सीट पर चुनावी लड़ाई को हिमंत ने निजी बना लिया था. 

असम की जिन तीन सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा, उनमें से जोरहाट भी एक है, जहां कांग्रेस उम्मीदवार गौरव गोगोई ने मौजूदा भाजपा सांसद तपन कुमार गोगोई को हरा दिया. जीत का अंतर भी 1.4 लाख वोटों से ज्यादा का है. मामला तब बिगड़ गया जब गौरव की जीत के बाद हिमंत की आलोचना होने लगी और कुछ भाजपा विधायकों ने सार्वजनिक रूप से गौरव की जीत की सराहना की और गौरव गोगोई को बधाई दे दी. इसके बाद असम भाजपा में पुराने बनाम नए के बीच की खींचतान को भी सामने ला दिया.

उत्तर प्रदेश में भी सबकुछ ठीक नहीं?

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के कुछ मिनट पहले तक NDA नेताओं का दावा था कि हम 80 में से 80 सीटों पर जीत दर्ज करेंगे, लेकिन जब नतीजे सामने आए, तो NDA को मात्र 36 सीटों पर जीत मिली. इतनी बड़ी हार के बाद किसी नेता ने योगी को तो किसी ने केंद्रीय नेतृत्व को जिम्मेदार ठहरा दिया. माना जा रहा है कि इस बार के बाद योगी आदित्यनाथ पर दबाव बढ़ेगा. हालांकि, योगी की ओर से उनकी मेहनत में कोई कमी नहीं दिख रही है. उन्होंने 150 से ज्यादा रैलियां कीं, 13 रोड शो भी किए. हालांकि नतीजे जब आए तो यूपी में NDA चारों खाने चित नजर आई.

भाजपा के वोट शेयर न सिर्फ गिरावट आई, बल्कि कई बड़े चेहरों को भारी अंतर से हार का सामना करना पड़ा. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यूपी से 11 केंद्रीय मंत्री आते थे, जिनमें से 7 को हार का सामना करना पड़ा. उधर, हार का कलह महाराष्ट्र में भी आंशिक तौर पर दिखा, जहां NDA को भारी नुकसान उठाना पड़ा. हार के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी. उन्होंने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मैं पार्टी को ज्यादा समय देना चाहता हूं.