पुलिस की मदद करने गए थे 3 'उग्रवादी', गोलीबारी में वही हो गए ढेर, HMAR संगठनों ने बताया फर्जी एनकाउंटर
Cachar Encounter: असम के कछार में हुए एक कथित एनकाउंटर को लेकर हंगामा मच गया है. अब इस पर HMAR स्टूडेंट्स असोसिएशन ने कहा है कि यह एनकाउंटर फर्जी है और इन लड़कों को पुलिस ने ही मार डाला है. वहीं, पुलिस का कहना है कि एनकाउंटर के दौरान इन तीनों को गोली लग गई थी और इनकी मौत हो गई.
असम का कछार जिला मणिपुर सीमा से लगता है. यही वजह है कि अक्सर यहां उग्रवादी हमले होते रहते हैं और उग्रवादी संगठनों के लोग एनकाउंटर में मारे भी जाते हैं. 16 जुलाई को हुए एक एनकाउंटर में तीन लोगों को मारा गया है. अब इस एनकाउंटर को लेकर सवाल उठाए जाने लगे हैं. HMAR संगठनों का कहना है कि यह एनकाउंटर फर्जी है और पुलिस के दावे पूरी तरह से मनगढ़ंत हैं. इन संगठनों ने चिट्ठी लिखकर मांग की है कि इसकी जांच करवाई जाए और न्याय दिया जाए. इन संगठनों का कहना है कि तीनों लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था ऐसे में इसे कस्टोडियल डेथ कहा जाना चाहिए.
पुलिस की ओर से आई जानकारी के मुताबिक, कछार के पहाड़ी इलाके में यह एनकाउंटर हुआ था जिसमें तीन लोगों को मार गिराया गया. पुलिस का कहना है कि इन लोगों के पास एके सीरीज की राइफलें, एक 9 एमएम पिस्टल, गोलियां और कई अन्य हथियार मिले हैं. डीआईजी (साउथ रेंज) कंगकन ज्योति साइकिया का कहना है कि पुलिस ने तीन उग्रवादियों को हथियार के साथ पकड़ा था और इन्होंने ही भुबन हिल्स में बने उग्रवादियों के अन्य ठिकानों को खोजने में मदद की.
HMAR स्टूटडेंट्स असोसिएशन का कहना है कि पुलिस जिस एनकाउंटर का दावा कर रही है उसमें कई गड़बड़ियां हैं और सामने आए वीडियो उसके उलट बातें दिखा रहे हैं, जो दिखाते हैं कि पूरी कहानी गढ़ी गई है. अब इन संगठनों की मांग है कि तीनों की मौत के मालमे में निष्पक्ष जांच करवाई जाए. इसके अलावा, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस मामले को संज्ञान में ले और कार्यवाही करे.