भारत के Su-30MKI पर आर्मेनिया की नजर, डिफेंस सेक्टर भारत की बढ़ती ताकत का दुनिया मान रही लोहा
अजरबैजान द्वारा पाकिस्तान के साथ 4.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बड़े समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद आर्मेनिया उन्नत लड़ाकू जेट के लिए भारत की ओर रुख कर रहा है.
नई दिल्ली: भारत डिफेंस सेक्टर में अपना दायरा बढ़ा रहा है. अंतरराष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा समाचार मंच डिफेंस सिक्योरिटी एशिया के अनुसार, आर्मेनिया भारत के साथ Su-30MKI लड़ाकू विमान खरीदने के लिए गंभीर बातचीत कर रहा है. यह कदम अजरबैजान द्वारा हाल ही में पाकिस्तान से 40 JF-17 थंडर ब्लॉक III विमान खरीदने के जवाब में उठाया गया है.
आर्मेनिया भारत के Su-30MKI को अजरबैजान के नए चीनी-पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों का सटीक जवाब मानता है. पिछले कुछ वर्षों में भारत आर्मेनिया का सबसे विश्वसनीय रक्षा साझेदार बनकर उभरा है. नई दिल्ली पहले ही उसे आकाश-1एस सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली और शक्तिशाली पिनाका रॉकेट लॉन्चर प्रणाली जैसे उन्नत हथियार दे चुका है.
फ्रांस भी इस मामले में शामिल हो गया है, जहां डसॉल्ट एविएशन ने अपने प्रसिद्ध राफेल लड़ाकू विमान आर्मेनिया को देने की पेशकश की है. हालांकि, विमान की ऊंची कीमत और उसके जंग में उठे प्रदर्शन पर उठे सवालों ने अर्मेनियाई अधिकारियों को दो बार सोचने पर मजबूर कर दिया है. हाल ही में भारत-पाकिस्तान हवाई झड़प की रिपोर्टों में दावा किया गया था कि पाकिस्तान के J-10CE लड़ाकू विमानों ने उन्नत PL-15 मिसाइलों का इस्तेमाल करके तीन भारतीय राफेल विमानों को मार गिराया. हालांकि ये दावे झूठे हैं.
भारत के भरोसे है आर्मेनिया
प्रतिष्ठित अमेरिकी शोध संस्थान, रैंड (RAND) के विश्लेषण निदेशक सैम लिचेंस्टीन ने फोर्ब्स को बताया कि आर्मेनिया कई विकल्पों पर विचार कर रहा है, लेकिन सबसे ज़्यादा संभावना है कि वह भारत के Su-30MKI को चुनेगा. इसके मुख्य कारण Su-30MKI की कीमत फ्रांसीसी राफेल से काफ़ी कम है, साथ ही यह उत्कृष्ट प्रदर्शन, विभिन्न अभियानों के लिए लचीलापन और भारत से मजबूत तकनीकी सहायता प्रदान करता है.
अजरबैजान द्वारा 40 जेएफ-17 ब्लॉक III लड़ाकू विमानों के लिए 4.6 अरब डॉलर का सौदा पाकिस्तान-चीन संयुक्त उद्यम के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. यह विमान चीन के उन्नत जे-20 लड़ाकू विमानों जैसी पांचवीं पीढ़ी की तकनीक से लैस है, जिसमें एईएसए रडार और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली शामिल हैं. अज़रबैजान अपने पुराने रूसी मिग-29 विमानों को इन आधुनिक लड़ाकू विमानों से बदलने की योजना बना रहा है, जिससे उसकी युद्धक क्षमताएं काफ़ी बढ़ जाएंगी.
चीन और पाकिस्तान की नजर छोटे देशों पर
चीन और पाकिस्तान उस बाज़ार में अपनी पैठ बना रहे हैं जिस पर दशकों तक रूस का दबदबा रहा है, जिससे काकेशस की भू-राजनीतिक गतिशीलता पूरी तरह बदल रही है. भारत Su-30MKI के जरिए अपनी मजबूत रक्षा निर्माण क्षमताओं का प्रदर्शन कर रहा है. यह विमान रूस के Su-30 का एक अनुकूलित संस्करण है, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारत में ही बनाया है. भारत पहले से ही ऐसे 270 से ज़्यादा विमानों का संचालन कर रहा है, जो भारत में निर्मित एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और लंबी दूरी की अस्त्र मिसाइलों से लैस हैं.
आर्मेनिया भारत से 8 से 12 Su-30MKI विमान खरीद सकता है
सूत्रों का कहना है कि आर्मेनिया भारत से 8 से 12 Su-30MKI विमान खरीद सकता है. इसके अलावा, भारत को आर्मेनिया के मौजूदा चार Su-30SM लड़ाकू विमानों को उन्नत करने और उन्हें भारतीय हथियारों और आधुनिक डेटा-लिंक्ड प्रणालियों से जोड़ने के लिए सबसे अच्छा साझेदार माना जा रहा है. लिचेंस्टीन ने बताया कि भारत निश्चित रूप से अजरबैजान के साथ पाकिस्तान के समझौते के जवाब में इन प्रणालियों की आपूर्ति करना चाहेगा.