Live In Controversy: धार्मिक कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने एक बार फिर विवादित टिप्पणी कर दी है. इस बार उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले युवाओं की तुलना कुत्तों से कर दी. उनका कहना था कि जैसे भारत में हजारों साल से कुत्ते लिव-इन में रहते आए हैं, वैसे ही आज लिव-इन में रहने वाले लोग भी उसी तरह हैं. इस बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है.
यह पहला मौका नहीं है जब अनिरुद्धाचार्य अपने बयानों को लेकर विवादों में घिरे हों. इससे पहले वे 25 साल की लड़कियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुके हैं. उन्होंने उन्हें वेश्याओं से तुलना तक कर दी थी. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा था कि सुंदर दिखने के लिए चेहरे पर गोबर लगाना चाहिए. स्वतंत्रता दिवस को लेकर भी उन्होंने अज्ञानता भरी बातें कही थीं, जिसके बाद उनकी कड़ी आलोचना हुई थी.
अब लिव-इन को लेकर दिए गए इस बयान ने एक बार फिर उन्हें विवादों के घेरे में ला दिया है. सामाजिक और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि लिव-इन रिलेशनशिप का विषय चर्चा और बहस का मुद्दा हो सकता है, लेकिन इसे लेकर इस तरह की अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल समाज में गलत संदेश देता है.
लिव-इन संबंधों को लेकर भारत में समय-समय पर बहस होती रही है. सुप्रीम कोर्ट तक ने लिव-इन को मान्यता दी है और इसे दो वयस्कों का व्यक्तिगत निर्णय बताया है. ऐसे में धार्मिक मंच से इस प्रकार के बयान न केवल असंवेदनशील माने जा रहे हैं, बल्कि समाज को बांटने वाले भी कहे जा रहे हैं.
अनिरुद्धाचार्य के लगातार विवादित बयानों से उनकी छवि पर सवाल खड़े हो रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि एक कथावाचक जो धर्म और समाज को दिशा देने का दावा करता है, उसे अपनी भाषा संयमित रखनी चाहिए लेकिन बार-बार भद्दी टिप्पणियां करना न केवल उनकी गंभीरता पर सवाल उठाता है बल्कि धार्मिक प्रवचनों की साख को भी धक्का पहुंचाता है.
समाजशास्त्रियों का मानना है कि इस तरह की भाषा का असर युवा पीढ़ी पर नकारात्मक रूप से पड़ता है. लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर पक्ष और विपक्ष दोनों तर्क मौजूद हैं, लेकिन गरिमा बनाए रखते हुए चर्चा करना ही उचित है. अनिरुद्धाचार्य का यह नया बयान न सिर्फ व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रहार है बल्कि सामाजिक मर्यादा के भी खिलाफ माना जा रहा है.