अनिल अंबानी पर फिर चला ED का डंडा, लोन धोखाधड़ी केस में 14 नवंबर को किया तलब
Businessman अनिल अंबानी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 17,000 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड मामले में दूसरी बार समन जारी किया है. उन्हें 14 नवंबर को पूछताछ के लिए पेश होने को कहा गया है. यह मामला कई बैंकों से लिए गए कथित कर्ज और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है.
नई दिल्ली: रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर पूछताछ के लिए समन जारी किया है. यह मामला कथित बैंक लोन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है. 66 वर्षीय कारोबारी को 14 नवंबर को ईडी के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए गए हैं.
यह दूसरी बार है जब अनिल अंबानी को इस मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया है. इससे पहले उन्हें अगस्त 2025 में पूछताछ के लिए तलब किया गया था. उस समय ईडी ने उनके साथ-साथ रिलायंस समूह की कई कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की थी. मामला उन कर्जों से जुड़ा है जो रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) और अन्य संबंधित इकाइयों ने 2010 से 2012 के बीच भारतीय बैंकों से लिए थे.
ईडी की जांच में सामने आए बड़े आरोप
ईडी की जांच का केंद्रबिंदु उन कर्जों पर है जिनमें कथित तौर पर भारी अनियमितताएं की गईं. जांच एजेंसी के अनुसार, इन लोन की बड़ी राशि समूह की अन्य कंपनियों में स्थानांतरित की गई, जिससे लोन की शर्तों का उल्लंघन हुआ. एजेंसी का दावा है कि समूह ने बैंकों से लिए गए हजारों करोड़ रुपये का उपयोग अपने कारोबारी संचालन के बजाय पुराने कर्जों की अदायगी में किया, जिसे वित्तीय जगत में “एवर्ग्रीनिंग ऑफ लोन” कहा जाता है.
ईडी के अनुसार, लगभग ₹40,185 करोड़ के बकाये अब भी अनचुकाए हैं और पांच बैंकों ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के खातों को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत किया है. एजेंसी का कहना है कि 2010 से 2012 के बीच समूह ने विभिन्न बैंकों से हजारों करोड़ रुपये जुटाए, जिनमें से करीब ₹19,694 करोड़ अब भी बकाया हैं और इन्हें एनपीए घोषित कर दिया गया है.
ईडी का अनुमान है कि कम से कम ₹13,600 करोड़ रुपये जटिल लेन-देन के जरिए अन्य कंपनियों में या विदेशों में भेजे गए. यह राशि कथित रूप से फर्जी कंपनियों और संबंधित इकाइयों के माध्यम से ट्रांसफर की गई थी ताकि फंड के वास्तविक इस्तेमाल को छिपाया जा सके.
कई एजेंसियों की नजर में रिलायंस ग्रुप
रिलायंस समूह के खिलाफ जांच केवल ईडी तक सीमित नहीं है. हाल के महीनों में इस पर कई सरकारी एजेंसियों ने शिकंजा कस दिया है. इनमें सीबीआई (CBI), सेबी (SEBI), कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय (MCA) और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) शामिल हैं.
कॉरपोरेट मंत्रालय ने हाल ही में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और CLE प्राइवेट लिमिटेड जैसी कई कंपनियों में फंड डायवर्जन के आरोपों की जांच शुरू की है. मंत्रालय की प्रारंभिक रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आने के बाद मामला एसएफआईओ (SFIO) को सौंप दिया गया है.
एक अधिकारी के अनुसार, “जांच का उद्देश्य फंड डायवर्जन की पूरी श्रृंखला को ट्रेस करना और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करना है. एसएफआईओ की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.”
₹7,500 करोड़ की संपत्तियां जब्त
बीते सप्ताह ईडी ने रिलायंस समूह से जुड़ी लगभग ₹7,500 करोड़ की संपत्तियों को जब्त किया है. अधिकारियों ने बताया कि इन संपत्तियों में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की 30 संपत्तियां शामिल हैं, साथ ही आधार प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी, मोहनबीर हाई-टेक बिल्ड, गेम्सा इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट, विहान43 रियल्टी, और कैंपियन प्रॉपर्टीज से जुड़ी संपत्तियां भी अटैच की गई हैं.
ईडी का कहना है कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है, जो कथित मल्टी-करोड़ बैंक फ्रॉड मामले से जुड़ी है. अगस्त 2025 में ईडी और सीबीआई ने अनिल अंबानी के घर और दफ्तरों के अलावा रिलायंस समूह के वरिष्ठ अधिकारियों के ठिकानों पर भी छापे मारे थे. उस दौरान समूह के एक वरिष्ठ वित्त अधिकारी को फंड ट्रांसफर की कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया था.
लगातार आर्थिक संकट में रिलायंस समूह
कभी भारत की अग्रणी कारोबारी साम्राज्य के रूप में पहचाना जाने वाला रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) पिछले कई वर्षों से गहरे आर्थिक संकट में फंसा हुआ है. रिलायंस कम्युनिकेशंस दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है, जबकि रिलायंस होम फाइनेंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस, और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बैंकों और निवेशकों का भारी बकाया है.
इसके अलावा, सेबी भी समूह की कुछ कंपनियों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि निवेशकों को दी गई सूचनाएं और फंड के उपयोग से संबंधित खुलासे पारदर्शी थे या नहीं.
अनिल अंबानी के सामने अब एक बार फिर जांच एजेंसियों के सवाल होंगे, और यह देखना दिलचस्प होगा कि वे इस बार ईडी के सामने क्या सफाई देते हैं.