ट्रंप के टैरिफ युद्ध के बीच भारत और अमेरिका में हुआ बड़ा रक्षा समझौता, चीन को मिर्ची लगना तय!
यूएस-इंडिया डिफेंस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट का उद्देश्य सैन्य संबंधों और समन्वय को गहरा करना है, जबकि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत बिल्कुल अंतिम दौर में है.
शुक्रवार को कुआलालंपुर में भारत और अमेरिका के रक्षा मंत्रियों के बीच एक ऐसी मुलाकात हुई. इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के नेताओं ने एशियन डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग-प्लस (ADMM-Plus) के इतर 10 वर्षीय डिफेंस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट हस्ताक्षर किए.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे 'नया अध्याय' करार दिया, जबकि अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता का आधार बताया. यह समझौता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है
रक्षा सहयोग को गहरा करेगा समझौता
अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने समझौते की घोषणा करते हुए कहा कि यह डिफेंस पार्टनरशिप को गहरा करेगा, जो क्षेत्रीय स्थिरता और प्रतिरोधक क्षमता का आधार बनेगी. उन्होंने एक्स पर लिखा कि इससे समन्वय, सूचना साझा करने और तकनीकी सहयोग में वृद्धि होगी.
हेगसेथ ने इसे महत्वाकांक्षी रोडमैप करार दिया, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करेगा. उन्होंने जोर दिया कि अमेरिका की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता साझा हितों और आपसी विश्वास पर टिकी है. यह समझौता दोनों सेनाओं के बीच गहन सहयोग का वादा करता है.
डिफेंस संबंध भारत-अमेरिका रिश्तों का प्रमुख स्तंभ
हस्ताक्षर के बाद राजनाथ सिंह ने अमेरिकी समकक्ष से सकारात्मक चर्चा का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 'यूएस-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप' का यह फ्रेमवर्क पहले से मजबूत साझेदारी में नया युग लाएगा.
सिंह ने दोहराया कि डिफेंस संबंध भारत-अमेरिका रिश्तों का प्रमुख स्तंभ है. उन्होंने जोर दिया कि यह साझेदारी मुक्त, खुला और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है. यह समझौता सैन्य संबंधों में एक टर्निंग पॉइंट साबित होगा.
जल्दबाजी में कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा भारत
यह समझौता तब हुआ जब भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में अस्थायी ठहराव है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ दोगुना करने का फैसला रूस से तेल आयात पर आधारित था.
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत जल्दबाजी में कोई सौदा नहीं करेगा और संप्रभु विकल्पों को सीमित करने वाले शर्तों को स्वीकार नहीं करेगा. गोयल ने स्पष्ट किया कि व्यापार सौदे केवल टैरिफ नहीं, बल्कि विश्वास और दीर्घकालिक सहयोग के बारे में हैं. दोनों पक्ष निष्पक्ष समझौते के लिए प्रयासरत हैं.