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बयान बहादुर स्वामी प्रसाद मौर्य को अखिलेश की नसीहत! बोले- 'ब्राह्मणों ने की शिकायत.. तार्किक विचार वरना..'

अपने विवादित बयानों से सुर्खियों में बने रहने वाले सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य पर पार्टी अनुशासन का डंडा चलने वाला है. अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य के बेतुके बयानों पर लगाम लगाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष को निर्देश दिया है. 

Avinash Kumar Singh

नई दिल्ली: अपने विवादित बयानों से सुर्खियों में बने रहने वाले सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य पर पार्टी अनुशासन का डंडा चलने वाला है. दरअसल बीते कल लखनऊ में सपा प्रदेश कार्यालय पर पार्टी की अहम बैठक हो रही थी. इस बैठक में ब्राह्मण नेताओं ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से स्वामी प्रसाद मौर्य के बयानों को लेकर शिकायत दर्ज करायी. जिसके बाद अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य के बेतुके बयानों पर लगाम लगाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष को निर्देश दिया है. 

'मौर्य को ऐसे बयान न देने के लिए बोलिए....'

स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयानों के सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने कहा "2024 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी की अहम बैठक में ब्राह्मण समाज से आए हुए नेताओं ने स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर एतराज जताते हुए उनकी शिकायत की है. हमनें प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल से बोला है कि उनको ऐसे बयान न देने के लिए बोलिए. उनको मना करिए अब वह ऐसा कुछ ना बोलें.  पार्टी के सभी नेताओं को भी यह निर्देश दीजिए कि वह आपत्तिजनक बयान देने से परहेज करें. सोशल मीडिया पर लिखना है तो तार्किक विचारों को लिखें वरना मत लिखें."

'हिंदू धर्म एक धोखा... मोहन भागवत और PM मोदी कह चुके....'

दरअसल स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीते दिनों बहुजन समाज अधिकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए हिंदू धर्म को धोखा बताया. मौर्य ने बड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि हिंदू एक धोखा है. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत दो बार कह चुके हैं कि हिंदू नाम का कोई धर्म नहीं है, बल्कि यह जीने का एक तरीका है. प्रधानमंत्री मोदी भी कह चुके हैं कि हिंदू नाम का कोई धर्म नहीं है. जब ये लोग ऐसे बयान देते हैं तो भावनाएं आहत नहीं होतीं लेकिन अगर स्वामी प्रसाद मौर्य यही कहते हैं तो अशांति फैलती है.

विवादित बयान से स्वामी प्रसाद मौर्य का पुराना नाता

बीते दिनों सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने ज्ञानवापी के एएसआई सर्वे को लेकर विवादित बयान दिया था. स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि बद्रीनाथ 8वीं सदी तक बौद्ध धर्मस्थल था और बौद्ध धार्मिक स्थल खत्म करके बद्रीनाथ मंदिर बनाया गया है. जिसके बाद सियासत शुरू हो गयी थी. वहीं उनका दूसरा विवादित बयान यह था कि रामचरितमानस के कुछ श्लोक जाति के आधार पर समाज के एक बड़े वर्ग का अपमान करते हैं. इन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. उनके इस बयान के बाद सियासी कोहराम खड़ा हो गया था.