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Ajmer Dargah: अजमेर-दरगाह शरीफ में शिव मंदिर का दावा, अदालत पहुंचा मामला, क्या अब होगा सर्वे?

याचिका में उस जगह पर पूजा करने की अनुमति मांगी गई है. पुरातत्व विभाग द्वारा सर्वे किए जाने की भी मांग की गई है. सिविल कोर्ट ने अल्पसंख्यक मंत्रालय, दरगाह कमेटी अजमेर और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) को नोटिस भेजा है.

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Gyanendra Sharma

संभल के शाही जामा मस्जिद के सर्वे विवाद के बाद राजस्थान के अजमेर दरगाह शरीफ के सर्वे को लेकर बुधवार को कोर्ट में याचिका दायर की गई है. कोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिका को स्वीकार कर लिया. याचिका में अजमेर शरीफ दरगाह को हिंदू मंदिर बताया गया है. हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की ओर से याचिका लगाई गई. अब इसपर अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी. 

बताया जा रहा है कि हिंदू पक्ष ने याचिका के साथ ही सबूत भी पेश किया गया है. याचिका में उस जगह पर पूजा करने की अनुमति मांगी गई है. साथ ही पुरातत्व विभाग द्वारा सर्वे किए जाने की भी मांग की गई है. सिविल कोर्ट ने अल्पसंख्यक मंत्रालय, दरगाह कमेटी अजमेर और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) को नोटिस भेजा है.

हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की याचिका पर बीते मंगलवार को सुनवाई हुई थी, तब कोर्ट ने 27 नवंबर यानि आज की तारीख दी थी. हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने दावा किया है कि अजमेर की दरगाह पहले हिंदू संकट मोचन मंदिर हुआ करती थी और इसके समर्थन में उन्होंने दस्तावेज और साक्ष्य भी प्रस्तुत किए. 

किताब को दिया हवाला

विष्णु गुप्ता के वकील ने कोर्ट में अपनी याचिका में हरविलास शारदा की किताब अजमेर ऐतिहासिक और वर्णनात्मक के अलावा भारत में सूफ़ीवाद का इतिहास जैसी किताबों को दिखाया. हरविलास शारदा एक जज थे और उन्होंने  1911 में एक किताब अजमेर: हिस्टॉरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव लिखी थी. इसी किताब का हवाला देते हुए विष्णु गुप्ता के वकील ने कोर्ट में कहा कि दरगाह के निर्माण में मंदिर का मलबा इस्तेमाल किया गया था.साथ ही गर्भगृह और परिसर में एक जैन मंदिर होने की बात भी अदालत में रखी गई. जज चंदेल ने सभी पक्षों की सुनने के बाद इस याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए अगली तारीख़ 20 दिसंबर तय की.