'यह उन्हें शोभा नहीं देता', अजित पवार ने की BJP की आलोचना तो CM फडणवीस हुए नाराज, दी नसीहत

महाराष्ट्र की उलझी राजनीति में अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस के बीच बयानबाजी ने नई हलचल पैदा कर दी है. निकाय चुनावों से पहले सहयोगी दलों के बीच सार्वजनिक टकराव, महायुति की एकजुटता और भविष्य की दिशा पर सवाल खड़े करता है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति लगातार बदलते समीकरणों और टूटते-जुड़ते गठबंधनों का मंच बन गई है. जो दल लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ लड़ते दिखे, वही अब निकाय चुनावों में अलग राह चुन रहे हैं. इसी पृष्ठभूमि में डिप्टी सीएम अजित पवार के बयानों और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की नाराज प्रतिक्रिया ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है. यह विवाद केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि सत्ता संतुलन और भविष्य की राजनीति के संकेत भी देता है.

महाराष्ट्र की राजनीति में स्थिरता लंबे समय से दुर्लभ रही है. भाजपा और एनसीपी अजित गुट ने बड़े चुनाव साथ लड़े, लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों में अलग लड़ने का फैसला किया. इससे कार्यकर्ताओं में असमंजस बढ़ा और सहयोगी दलों के बीच भरोसे की परीक्षा शुरू हुई. बदलते गठबंधन राज्य की राजनीति को और जटिल बना रहे हैं.

अजित पवार के बयान से बढ़ा तनाव

डिप्टी सीएम अजित पवार ने चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा पर तीखे हमले किए. पिंपरी चिंचवाड नगर निगम चुनावों से पहले स्थानीय शासन को लेकर उनकी आलोचना ने महायुति के भीतर असहजता पैदा की. सहयोगी दल होने के बावजूद इस तरह की सार्वजनिक बयानबाजी को राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ माना गया.

फडणवीस की नाराजगी और संयम की सलाह

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अजित पवार के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए संयम बरतने की बात कही. उन्होंने कहा कि सहयोगी दलों के बीच तय हुआ था कि एक-दूसरे के खिलाफ सार्वजनिक बयान नहीं होंगे. पुणे में की गई आलोचना उन्हें शोभा नहीं देती. फडणवीस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मुंबई जाकर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे.

निकाय चुनावों में अलग राह

महायुति का हिस्सा होने के बावजूद अजित पवार ने कुछ नगर निगम सीटों पर अपने चाचा शरद पवार की पार्टी के साथ गठबंधन किया है. यह कदम भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा करता है. स्थानीय स्तर पर अलग-अलग गठबंधन राज्य स्तरीय साझेदारी की मजबूती पर सवाल उठाते हैं.

एनसीपी के फिर एक होने की अटकलें

हाल के दिनों में अजित पवार ने शरद पवार के साथ रिश्तों में सुधार के संकेत दिए. उन्होंने कहा कि पार्टी और परिवार में सब ठीक है और कार्यकर्ता भी साथ आना चाहते हैं. सुप्रिया सुले के साथ मंच साझा करने से एनसीपी के पुनर्मिलन की चर्चाएं तेज हो गईं. यह संकेत महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट माने जा रहे हैं.