'आजादी का मतलब मनमर्जी नहीं', NSA अजित डोभाल का Gen-Z को मैसेज

लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद एनएसए अजित डोभाल ने युवाओं से कहा कि आजादी अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों का नाम है और राष्ट्रहित हमेशा सर्वोपरि होना चाहिए.

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Sagar Bhardwaj

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल को पुणे में आयोजित एक समारोह में लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें यह सम्मान राष्ट्रसेवा और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान के लिए प्रदान किया. सम्मान समारोह के दौरान डोभाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता, जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण पर अपने विचार साझा किए.

आजादी के सही मायने समझने की दी सलाह

अपने संबोधन में अजित डोभाल ने कहा कि आजादी का मतलब मनमर्जी करना नहीं है. उन्होंने कहा कि कई लोग स्वतंत्रता को बिना किसी जिम्मेदारी के अपनी इच्छा के अनुसार काम करने की छूट समझ लेते हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है. उनके अनुसार, हर नागरिक को अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझना चाहिए और ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे देश के हित को नुकसान पहुंचे.

राष्ट्रहित को हमेशा रखें सबसे ऊपर

डोभाल ने कहा कि भारत को एक मजबूत और सुरक्षित राष्ट्र बनाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है. उन्होंने युवाओं से शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़कर योगदान देने की अपील की. उन्होंने कहा कि किसी भी देश की असली ताकत उसके जागरूक, अनुशासित और जिम्मेदार नागरिक होते हैं. इसलिए व्यक्तिगत हित से पहले राष्ट्रहित को महत्व देना जरूरी है.


 लोकमान्य तिलक के विचारों को किया याद

एनएसए ने अपने भाषण में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के योगदान का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि तिलक ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में स्वराज की भावना जगाई और देशवासियों को एकजुट होकर आजादी के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी. उनके विचार आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं.

 नई पीढ़ी के लिए दिया खास संदेश

अजित डोभाल ने कहा कि डिजिटल दौर में युवाओं के सामने अवसर भी हैं और चुनौतियां भी. ऐसे समय में उन्हें अपने अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों का संतुलन बनाए रखना होगा. उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस यात्रा में युवाओं की भूमिका सबसे अहम है. उनका संदेश था कि देश की एकता, सुरक्षा और विकास को प्राथमिकता देकर ही सच्चे अर्थों में आजादी का सम्मान किया जा सकता है.