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हवा में घुला ऐसा जहर कि हो गई 170,000 बच्चों की मौत, कैसे जानलेवा प्रदूषण से बचाएं जान

जहरीली हवा, लोगों की जान पर भारी पड़ रही है. छोटे बच्चे, वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. छोटे बच्चे वायु प्रदूषण की वजह से निमोनिया, लंग इन्फेक्शन जैसी बीमारियों का शिकार हो जाते हैं. हर 5 में से 1 बच्चे की मौत, इन वजहों से हो जाती है. हैरान करने वाली बात ये है कि लोगों की जान पर आफत है लेकिन किसी भी देश की सरकारें, प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी उपाय नहीं कर पाती हैं.

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दुनिया में जिस रफ्तार से प्रदूषण बढ़ रहा है, लोगों के लिए आने वाले दिनों में सांस लेना भी मुहाल हो जाएगा. बुधवार को स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर की एक रिपोर्ट ने चौंका दिया है. साल 2021 में भारत में वायु प्रदूषण की वजह से 5 साल से कम उम्र के लगभग 170,000 बच्चों की मौत होने का अनुमान है. हैरान करने वाली बात ये है कि ये आंकड़े सिर्फ एक साल के हैं.

दक्षिण एशिया और पूर्व, पश्चिम, मध्य और दक्षिणी अफ्रीका में भी वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं. इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन द्वारा ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज, इंजरी एंड रिस्क फैक्टर्स स्टडी (GBD 2021) के आंकड़ों पर आधारित स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर की ये रिपोर्ट चौंका रही है. 

किन बीमारियों के शिकार होते हैं छोटे बच्चे?

वायु प्रदूषण की वजह से छोटे बच्चों में निमोनिया, गले का संक्रमण और स्वांस नली में दिक्कतें पैदा होती हैं. यह वैश्विक स्तर पर हर 5 में से एक बच्चे की मौत का जिम्मेदार है. बच्चों में प्रदूषण के संपर्क में आने की वजह से कम उम्र में ही अस्थमा के मामले बढ़े हैं. 

स्टडी में अनुमान जताया गया है कि दक्षिण एशिया में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में वायु प्रदूषण से जुड़ी मृत्यु दर बेहद चौंकाने वाली है. हर 100,000 बच्चों पर 164 बच्चों की जान जाती है. वहीं वैश्विक तौर पर ये आंकड़ा, प्रति 100,000 लोगों पर 108 मौतें है.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2021 में भारत में करीब 169,400 मौतें, नाइजीरिया में 114,100 मौतें, पाकिस्तान में 68,100 मौतें, इथियोपिया में 31,100 मौतें और बांग्लादेश में 19,100 मौतें हुई हैं. इनमें ज्यादातर बच्चे वही हैं, जिनकी मौत वायु प्रदूषण से हुई है. 

बच्चों को कैसे नुकसान पहुंचाता है प्रदूषण?

आयशा लाइफकेयर हॉस्पिटल के डॉक्टर शाहिद बताते हैं कि बच्चों में वायु प्रदूषण से लड़ने की इम्युनिटी, वयस्कों की तुलना में बेहद कम होती है. क्लाइमेट चेंज और प्रदूषणकारी तत्वों की वजह से वे गंभीर बीमारियों का शिकार हो रही हैं. अगर बच्चा गर्भ में है तो भी उसके लिए प्रदूषण खतरनाक है. बच्चे, बड़ों की तुलना में ज्यादा प्रदूषक अवशोषित करते हैं. उनके फेफड़े, शरीर और मस्तिष्क अभी विकसित हो रहे हैं, इसलिए उनके बीमार होने की दर भी ज्यादा है. 

कैसे प्रदूषण से बच्चों को बचा सकते हैं?

डॉ. शाहिद बताते हैं कि अगर आप प्रदूषण वाले इलाकों में रहते हैं तो बच्चों को बाहर न निकलने दें. N95 मास्क का इस्तेमाल करें. उन जगहों पर न ले जाएं, जहां प्रदूषक ज्यादा हों. सिगरेट पीने वाले लोगों से बच्चों को दूर रखें, उनके पास किसी को भी सिगरेट पीने की इजाजत न दें. अपने आसपास ज्यादा हरियाली बरतें और घर में एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें.