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BMC चुनावों से पहले AIMIM को बड़ा झटका, अकोट नगर परिषद में 5 में से 4 पार्षद BJP खेमे में हुए शामिल

महाराष्ट्र में AIMIM को बड़ा झटका लगा है. अकोट नगर परिषद में पार्टी के पांच में से चार पार्षदों ने साथ छोड़ दिया, जिससे BJP के नेतृत्व में नया गठबंधन बन गया और स्थानीय सियासी समीकरण बदल गए.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
BMC चुनावों से पहले AIMIM को बड़ा झटका, अकोट नगर परिषद में 5 में से 4 पार्षद BJP खेमे में हुए शामिल
Courtesy: social media

बीएमसी चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली AIMIM को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में उसके अधिकांश पार्षदों ने पार्टी से नाता तोड़ लिया. इस घटनाक्रम ने न केवल अकोट की स्थानीय राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि राज्य में होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले सियासी संदेश भी दे दिया है.

अकोट में AIMIM को क्यों लगा झटका

अकोट नगर परिषद में हाल ही में हुए चुनावों में AIMIM ने पांच सीटें जीती थीं, लेकिन पार्टी अपनी स्थिति मजबूत नहीं रख सकी. पांच में से चार पार्षदों ने अलग रास्ता चुन लिया. इनमें से दो पार्षदों ने भाजपा को समर्थन दे दिया, जबकि दो अन्य ने अजित पवार गुट की एनसीपी का दामन थाम लिया. इस टूट ने AIMIM को परिषद में लगभग हाशिये पर ला खड़ा किया.

नगर परिषद का बदला हुआ गणित

अकोट नगर परिषद की कुल 35 सीटों में से 33 पर चुनाव हुए थे. भाजपा 11 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. कांग्रेस को छह सीटें मिली थीं, जबकि AIMIM पांच सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही थी. बहुमत के लिए 17 पार्षदों का समर्थन जरूरी था. AIMIM में टूट के बाद यह समीकरण पूरी तरह बदल गया और भाजपा की राह आसान हो गई.

‘अकोट विकास मंच’ के जरिए BJP की रणनीति

सत्ता में आने के लिए भाजपा ने ‘अकोट विकास मंच’ नाम से एक नया गठबंधन तैयार किया है. इस मंच में शिंदे गुट की शिवसेना, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना, दोनों एनसीपी गुट, प्रहार जनशक्ति पार्टी और AIMIM से टूटकर आए चार पार्षद शामिल हैं. भाजपा ने इस गठबंधन की जानकारी औपचारिक रूप से अकोला कलेक्टर को सौंप दी है.

AIMIM और विपक्ष की स्थिति कमजोर

नए गठबंधन के बनने के बाद अकोट नगर परिषद में AIMIM केवल एक पार्षद तक सिमट गई है. कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाड़ी भी अब विपक्ष की भूमिका में आ गई हैं. स्थानीय स्तर पर AIMIM के लिए यह स्थिति न सिर्फ संगठनात्मक, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बड़ा झटका मानी जा रही है.

BMC चुनावों से पहले सियासी संकेत

इस घटनाक्रम को बीएमसी चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है. महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग ने जनवरी में बीएमसी समेत 29 नगर निगमों के चुनाव कराने की घोषणा की है. मुंबई की 227 वार्डों में मतदान होना है. अकोट की यह सियासी टूट यह संकेत देती है कि नगर निकाय चुनावों से पहले दल-बदल और गठबंधन की राजनीति और तेज हो सकती है.