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'समानता और सौहार्द सुनिश्चित करना...', ABVP ने UGC के नए रूल्स का किया समर्थन, लेकिन रख दी ये बड़ी शर्त

ABVP ने अपने बयान में कहा कि समता से जुड़े इन नए विनियमों की कुछ शब्दावली और नियमों को लेकर छात्रों, अभिभावकों और समाज के अन्य वर्गों में भ्रम की स्थिति बन रही है.

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Anuj

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की हाल में जारी अधिसूचना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

ABVP ने कहा है कि इस पहल का मूल उद्देश्य सकारात्मक है और संगठन इसका समर्थन करता है, लेकिन इसके कुछ प्रावधानों को लेकर और अधिक स्पष्टता और संतुलन की जरूरत है.

छात्रों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल को बढ़ावा

ABVP का मानना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद समान अधिकार, सामाजिक समता और भेदभाव से मुक्त वातावरण पर टिकी होती है. संगठन ने कहा कि यूजीसी और देश के सभी शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे इन मूल्यों को बनाए रखें और छात्रों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल को बढ़ावा दे. परिषद का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि एक समान और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण करना भी है.

ठोस कदम उठाने की मांग

ABVP ने अपने बयान में यह भी कहा कि समता से जुड़े इन नए विनियमों की कुछ शब्दावली और नियमों को लेकर छात्रों, अभिभावकों और समाज के अन्य वर्गों में भ्रम की स्थिति बन रही है. संगठन के अनुसार, यदि समय रहते इन आशंकाओं और गलतफहमियों को दूर नहीं किया गया, तो इससे समाज में अनावश्यक तनाव और विभाजन जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. इसी कारण ABVP ने यूजीसी से त्वरित और ठोस कदम उठाने की मांग की है.

'विश्वास बनाए रखने का अच्छा तरीका'

परिषद ने सुझाव दिया है कि यूजीसी सभी संबंधित पक्षों से खुलकर संवाद करे और इन नियमों को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करे. ABVP का कहना है कि नियमों की गलत व्याख्या को रोकना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या भ्रम फैलने न पाए. संगठन ने यह भी कहा कि पारदर्शिता और संवाद ही ऐसे संवेदनशील विषयों पर विश्वास बनाए रखने का सबसे अच्छा तरीका है.

न्यायालय में विचाराधीन मामला

ABVP ने यह भी ध्यान दिलाया कि यह पूरा मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है. ऐसे में संगठन का मत है कि यूजीसी को जल्द से जल्द अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए अदालत में हलफनामा दाखिल करना चाहिए. इससे न केवल स्थिति साफ होगी, बल्कि छात्रों और समाज के बीच फैली अनिश्चितता भी कम होगी.

ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री क्या बोले?

ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि शैक्षणिक परिसरों में समानता और सौहार्द सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है. उन्होंने बताया कि ABVP हमेशा से सभी वर्गों के छात्रों के लिए समान अवसर और भेदभाव-मुक्त वातावरण के पक्ष में खड़ा रहा है.

उनके अनुसार, विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब देना यूजीसी की जिम्मेदारी है. उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी को मिलकर सकारात्मक प्रयास करने होंगे.