स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी पहुंचे. यहां उन्होंने जिला परिषद स्कूल का निरीक्षण किया. दिपके ने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कई खामियों का दावा किया. उन्होंने कहा कि स्कूल की टूटी खिड़कियां और कम बेंच जैसी समस्याएं बच्चों की पढ़ाई के माहौल को प्रभावित कर रही हैं.
दिपके के मुताबिक स्कूल के शौचालय में पानी की समुचित व्यवस्था नहीं थी और कई खिड़कियां टूटी हुई मिलीं. उन्होंने यह भी दावा किया कि बच्चों की संख्या के मुकाबले स्कूल में पर्याप्त बेंच उपलब्ध नहीं थीं. उनका आरोप था कि उनके पहुंचने से पहले शौचालय की सफाई कराई गई. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकारी स्कूलों में आज भी जरूरी सुविधाएं नहीं हैं, तो देश के विकास का दावा कितना सार्थक है.
Broken windows in govt school being covered with the banners of Dy CM of Maharashtra. #SchoolThikKaro pic.twitter.com/XgXIcvbbnC
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) August 15, 2026
स्कूल की स्थिति का मुद्दा उठाते हुए दिपके ने शनिवार को महाराष्ट्र के हिंगोली से 'स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की सुविधाओं की स्थिति सामने लाने और संबंधित विभागों से जवाबदेही तय करने की कोशिश की जाएगी. उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीन पर मौजूद समस्याओं का समाधान जरूरी है.
How is any kid supposed to use this toilet? #SchoolThikKaro pic.twitter.com/WNkDAFn5sn
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) August 15, 2026
अभिजीत दिपके ने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में देश में 94 हजार से अधिक सरकारी स्कूल बंद हुए हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब बड़ी संख्या में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और सस्ती शिक्षा की जरूरत है, तब सरकारी स्कूलों को बंद करने की स्थिति क्यों पैदा हो रही है. हालांकि, उनके इस आंकड़े को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए जाने की जरूरत है.
Even after 80 years of Independence, our govt schools still lack basic amenities.
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) August 15, 2026
I spoke to the Sarpanch of my village, who has assured that the Panchayat will resolve all these issues within a week.
Change is possible when we come together and act.#SchoolThikKaro pic.twitter.com/HB4cWKj4D8
दिपके ने कहा कि सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी का सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण परिवारों पर पड़ता है. उनके मुताबिक यदि सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों, तो अभिभावकों पर महंगे निजी स्कूलों का दबाव कम हो सकता है. उन्होंने निजी स्कूलों की फीस पर भी सीमा तय करने की मांग उठाई.
दिपके ने कहा कि शिक्षा के बाद उनका अभियान सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की ओर भी बढ़ेगा. उन्होंने सरकारी अस्पतालों में मरीजों को फर्श पर इंतजार करने और जांच या सर्जरी के लिए लंबा समय लगने जैसी समस्याओं का मुद्दा उठाया. उनका कहना है कि ग्रामीण युवा अब सरकारी योजनाओं और बजट के इस्तेमाल को लेकर सवाल पूछेंगे. उनके अनुसार शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर जवाबदेही तय करना ही बदलाव की शुरुआत हो सकती है.