menu-icon
India Daily

डिप्टी CM के बैनर से ढकी टूटी खिड़कियां, अब स्कूलों की बदहाली पर अभिजीत दिपके ने खोला मोर्चा

महाराष्ट्र के हिंगोली में अभिजीत दिपके ने सरकारी स्कूल की बदहाल व्यवस्था का मुद्दा उठाया. उन्होंने स्कूल ठीक करो अभियान शुरू कर शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग की.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
डिप्टी CM के बैनर से ढकी टूटी खिड़कियां, अब स्कूलों की बदहाली पर अभिजीत दिपके ने खोला मोर्चा
Courtesy: X

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी पहुंचे. यहां उन्होंने जिला परिषद स्कूल का निरीक्षण किया. दिपके ने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कई खामियों का दावा किया. उन्होंने कहा कि स्कूल की टूटी खिड़कियां और कम बेंच जैसी समस्याएं बच्चों की पढ़ाई के माहौल को प्रभावित कर रही हैं.

शौचालय और खिड़कियों पर उठाए सवाल

दिपके के मुताबिक स्कूल के शौचालय में पानी की समुचित व्यवस्था नहीं थी और कई खिड़कियां टूटी हुई मिलीं. उन्होंने यह भी दावा किया कि बच्चों की संख्या के मुकाबले स्कूल में पर्याप्त बेंच उपलब्ध नहीं थीं. उनका आरोप था कि उनके पहुंचने से पहले शौचालय की सफाई कराई गई. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकारी स्कूलों में आज भी जरूरी सुविधाएं नहीं हैं, तो देश के विकास का दावा कितना सार्थक है.

'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत

स्कूल की स्थिति का मुद्दा उठाते हुए दिपके ने शनिवार को महाराष्ट्र के हिंगोली से 'स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू करने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की सुविधाओं की स्थिति सामने लाने और संबंधित विभागों से जवाबदेही तय करने की कोशिश की जाएगी. उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीन पर मौजूद समस्याओं का समाधान जरूरी है.

सरकारी स्कूल बंद होने का दावा

अभिजीत दिपके ने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में देश में 94 हजार से अधिक सरकारी स्कूल बंद हुए हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब बड़ी संख्या में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और सस्ती शिक्षा की जरूरत है, तब सरकारी स्कूलों को बंद करने की स्थिति क्यों पैदा हो रही है. हालांकि, उनके इस आंकड़े को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए जाने की जरूरत है.

गरीब परिवारों की शिक्षा पर चिंता

दिपके ने कहा कि सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी का सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण परिवारों पर पड़ता है. उनके मुताबिक यदि सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों, तो अभिभावकों पर महंगे निजी स्कूलों का दबाव कम हो सकता है. उन्होंने निजी स्कूलों की फीस पर भी सीमा तय करने की मांग उठाई.

अब सरकारी अस्पतालों पर नजर

दिपके ने कहा कि शिक्षा के बाद उनका अभियान सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की ओर भी बढ़ेगा. उन्होंने सरकारी अस्पतालों में मरीजों को फर्श पर इंतजार करने और जांच या सर्जरी के लिए लंबा समय लगने जैसी समस्याओं का मुद्दा उठाया. उनका कहना है कि ग्रामीण युवा अब सरकारी योजनाओं और बजट के इस्तेमाल को लेकर सवाल पूछेंगे. उनके अनुसार शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर जवाबदेही तय करना ही बदलाव की शुरुआत हो सकती है.