‘मुझे फांसी पर चढ़ा दो’, तिरंगा यात्रा से पहले घर पहुंची दिल्ली पुलिस से बोले अभिजीत दिपके

तिरंगा यात्रा से पहले दिल्ली पुलिस CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के घर पहुंची और उन्हें एक नोटिस धमाया. अभिजीत ने इस नोटिस पर सवाल उठाए दिपके ने नोटिस पर सवाल उठाए.

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Sagar Bhardwaj

तिरंगा यात्रा से पहले दिल्ली पुलिस कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के नई दिल्ली स्थित घर पहुंची. पुलिस ने उन्हें बिना अनुमति मार्च निकालने और भीड़ जुटाने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी. दिपके ने पुलिस से सवाल किया कि उनके खिलाफ किस आधार पर आरोप लगाए जा रहे हैं.

मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों के खिलाफ मार्च

CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध जताने के लिए शुक्रवार को सेंट्रल पार्क में लोगों और समर्थकों से राष्ट्रीय ध्वज लेकर जुटने की अपील की थी. पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाताओं की सूची में गड़बड़ी हुई है.

पुलिस के नोटिस पर भड़के दिपके

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में 31 वर्षीय दिपके अपने घर पर पुलिस के नोटिस को पढ़ते और उस पर सवाल उठाते दिखाई देते हैं. उनके कंधों पर छोटा तिरंगा था और उन्होंने महात्मा गांधी की तस्वीर वाली सफेद टी-शर्ट पहन रखी थी. नोटिस में कथित तौर पर कहा गया था कि दिपके सोशल मीडिया के जरिए आम लोगों को उकसा रहे थे, जो गैरकानूनी है. इस पर उन्होंने पुलिस से सबूत दिखाने की चुनौती दी और कहा कि वे ऐसा कोई वीडियो नहीं दिखा पाएंगे, जिसमें वह हिंसा के लिए उकसाते नजर आते हों. दिपके ने नाराजगी जताते हुए कहा, 'फांसी पर चढ़ा दो ना. क्या मजाक है ये?' उन्होंने नोटिस की भाषा और उसमें लगाए गए आरोपों पर भी सवाल उठाए.


तिरंगा लहराना गैरकानूनी नहीं, लेकिन मार्च पर रोक

पुलिस ने दिपके को बताया कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना या लहराना गैरकानूनी नहीं है. हालांकि, बिना अनुमति मार्च निकालना और भीड़ जुटाना लागू प्रतिबंधों का उल्लंघन हो सकता है. पुलिस ने राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुड़े नियमों का पालन करने की हिदायत भी दी. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी. पुलिस ने यह भी कहा कि लोगों के एक सीमित समूह को किसी उपयुक्त स्थान पर तिरंगा लहराने और राष्ट्रगान गाने की अनुमति देने की व्यवस्था की जा सकती है.

सेंट्रल पार्क दो दिन बंद रखने का फैसला

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए शुक्रवार और शनिवार को सेंट्रल पार्क आम लोगों के लिए बंद रखने की घोषणा की थी. इस बीच, नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन ने राजनीतिक दलों और प्रदर्शनकारियों से कनॉट प्लेस में प्रदर्शन नहीं करने की अपील की. संगठन का कहना था कि पिछले तीन सप्ताह से जारी प्रदर्शनों के कारण दुकानदारों, वेटरों, ड्राइवरों और अन्य कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित हुई है. सड़कें बंद होने और यातायात बाधित होने से कारोबार पर भी असर पड़ा है.

गांधी और आंबेडकर के विचारों से प्रेरित आंदोलन

दिपके ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उनका अभियान महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों से प्रेरित है. उन्होंने दावा किया कि पार्टी शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से जवाबदेही की मांग कर रही है.

विमान में हिरासत से शुरू हुआ विवाद

इससे पहले शनिवार सुबह मुंबई से दिल्ली पहुंचे दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को विमान के भीतर ही पुलिस ने रोक लिया था. CJP ने आरोप लगाया कि नेताओं को प्रस्तावित प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए यह कार्रवाई पहले से तय योजना का हिस्सा थी. दिपके ने वीडियो में पुलिस पर विमान के भीतर यात्रियों को परेशान करने का आरोप लगाया और कार्रवाई को तानाशाही बताया. हिरासत के दौरान उन्हें अपनी दादी के निधन की खबर भी मिली.

CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, तीनों नेताओं को अलग-अलग स्थानों पर हिरासत में रखने के बाद इस शर्त पर रिहा किया गया कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे.

सौरव दास और आशुतोष रांका फिर गिरफ्तार

मंगलवार को सौरव दास और आशुतोष रांका को दोबारा हिरासत में लिया गया. उन्हें जंतर-मंतर में कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश करने के मामले में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया. यह कार्रवाई उस समय हुई, जब जंतर-मंतर को एक दिन पहले प्रदर्शन स्थल का दर्जा नहीं दिए जाने की घोषणा की गई थी.