'उन्हें मेरे पास लाओ, मैं पूछूंगा कि...', अपने करीबी सचिन अहीर के शिंदे गुट में शामिल होने पर भड़के आदित्य ठाकरे

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है. शिवसेना के वरिष्ठ नेता और आदित्य ठाकरे के सबसे करीबी माने जाने वाले सचिन अहीर ने पार्टी छोड़ दी और एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए. इस घटना को 'ऑपरेशन टाइगर-3' नाम दिया जा रहा है.

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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है. शिवसेना के वरिष्ठ नेता और आदित्य ठाकरे के सबसे करीबी माने जाने वाले सचिन अहीर ने पार्टी छोड़ दी और एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए. इस घटना को 'ऑपरेशन टाइगर-3' नाम दिया जा रहा है. सचिन अहीर शिंदे गुट में शामिल होते ही महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल कर चुके हैं. 

करीबी MLC के शिंदे गुट में जाने पर भड़के आदित्य ठाकरे

दिलचस्प यह है कि शिंदे गुट ने अपने अपने कई दावेदारों को पीछे रखकर विपक्षी नेता को यह मौका दिया. सचिन अहीर लंबे समय से आदित्य ठाकरे के बेहद भरोसेमंद सहयोगी रहे हैं. खासकर मुंबई की वर्ली सीट पर वे उनकी मुख्य रणनीति बनाने वाले नेता थे. 

साल 2019 में जब आदित्य ठाकरे पहली बार वर्ली से विधायक बने थे, तब चुनाव की पूरी कमान अहीर के पास थी. उस समय वे एनसीपी में थे, बाद में उन्हें शिवसेना में लाया गया और वर्ली-शिवड़ी क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई.


आदित्य ठाकरे का गुस्सा

अहीर के इस फैसले से आदित्य ठाकरे काफी नाराज नजर आए. उन्होंने कहा- 'उसे मेरे पास खींचकर लाओ, मैं खुद उनसे पूछूंगा कि पार्टी ने उन्हें क्या नहीं दिया?' आदित्य ने आगे कहा कि जीवन में कुछ सिद्धांत होने चाहिए. जब पार्टी मुश्किल समय में आपके साथ खड़ी हो तो आपको भी उसके साथ रहना चाहिए. 

आदित्य ठाकरे ने अहीर पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन्हें पार्टी में हर संभव सम्मान और जिम्मेदारी दी गई थी. वे शिवसेना (यूबीटी) के उपनेता थे, एमएलसी बनाए गए, उनकी बेटी के एनजीओ को वार्ड स्तर की समिति में जगह मिली, वे भारतीय कामगार सेना में पद पर हैं और 'बेस्ट' संघ के प्रमुख भी रहे. आदित्य ने पूछा- 'फिर भी उन्हें क्या कमी रही?'

शिंदे गुट में स्वागत

दूसरी तरफ एकनाथ शिंदे ने सचिन अहीर का स्वागत करते हुए उन्हें सचिन तेंदुलकर की उपमा दी. शिंदे गुट अब इस नए शामिली से अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.