भारत में इस साल भीषण गर्मी पड़ रही है. तापमान ने इस बार अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. हाल ही में दिल्ली के मुंगेशपुर में 52.3 डिग्री तापमान दर्ज किया गया जो कि दिल्ली में अब तक का सर्वाधिक तापमान था. भीषण गर्मी की वजह से यूपी के मिर्जापुर में चुनावी ड्यूटी में लगे 12 लोगों ने अपनी जान गंवा दी. प्रयागराज में पिछले 24 घंटे में 29 लोगों की गर्मी के कारण मौत हो चुकी है. ये तो केवल कुछ आंकड़े हैं भारत में कई अन्य जगहों पर ही गर्मी और लू के कारण मौत की खबरें सामने आई हैं. गर्मी से होने वाली मौतों का यह आंकड़ा भले ही आपको ऐसा लग रहा हो लेकिन ऐस समय ऐसा भी था जब गर्मी के कारण एक देश में एक ही सीजन में 56 हजार लोगों की मौत हो गई थी.
रूस में हुई थी यह त्रासदी
ये घटना रूस में घटी थी. जुलाई और 2010 में रूस में भीषण हीटवेव चली थी. तब मॉस्को की ओर से जानकारी दी गई थी कि इस हीटवेव के कारण जुलाई में 14,500 और अगस्त में 41,300 लोग मौत की नींद सो गए. हैरानी की बात ये है कि उस समय तापमान आज के तापमान से बहुत कम मात्र 44 डिग्री सेल्सियस था लेकिन रूस के लिहाज से यह काफी था.
रूस ने जारी किया था सरकारी आंकड़ा
यह कोई हवा हवाई बात नहीं ती बल्कि रूस की सरकार ने आधिकारिक रूप से यह आंकड़ा जारी किया था. रूस के आर्थिक विकास मंत्रालय की मासिक आर्थिक रिपोर्ट में बताया गया था कि इस अवधि में देश भर में लगभग 56 हजार लोगों की जान चली गई थी.
तेजी से बढ़ने लगा था कैंसर
रिपोर्ट में एक परेशान करने वाली बात जो सामने आई थी वह ये कि 44 दिनों तक चली इस हीटवेव में पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियां और कैंसर भी लोगों में तेजी से बढ़ने लगा था.
गर्मी के कारण हर साल हो रही 489000 लोगों की मौत
विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2000 से 2019 के बीच की स्टडी के मुताबिक गर्मी से होने वाली दिक्कतों के कारण दुनियाभर में हर साल 489000 लोगों की जान चली जाती है. इसमें सबसे ज्यादा 45 फीसदी मौतें केवल एशिया में होती हैं.
इसमें दूसरा स्थान यूरोप का है जहां गर्मी के कारण 36 फीसदी लोगों की जान चली जाती है. WHO के मुताबिक अकेले 2022 में गर्मी के कारण यूरोप में 61672 लोगों की जान चली गई थी. 2003 में जून से अगस्त के बीच यूरोप में लगभग 70 हजार लोगों की जान गर्मी के कारण चली गई थी.
बुजुर्गों के लिए बढ़ रहा अधिक खतरा
WHO का कहना है कि भीषण गर्मी के कारण मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है. बदलते मौसम में गर्मी से जुड़ी समस्याओं के कारण 65 साल से अधिक उम्र के लोगों की मौत की संख्या भी बढ़ रही है. इसके कारण 2000 से 2004 और फिर 2017 से 2021 के बीच बुजुर्गों की मौत का आंकड़ा लगभग 85 फीसदी बढ़ गया था.
इंसान खुद बन रहा अपनी मौत की वजह
लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनियाभर में भीषण गर्मी से होने वाली एक तिहाई मौतों के लिए खुल इंसान जिम्मेदार है. 1991 से 2018 के आंकड़ों के अध्ययन पर कहा गया कि गर्मी के कारण 37 फीसदी मौतें केवल इंसानों की गतिविधियों के कारण हुई हैं. इसके रिपोर्ट के लिए दुनियाभर के 73 देशों के 732 क्षेत्रों का डाटा जुटाया गया.
समय से पहले हो जाती है मौत
वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ता जाता है, हवाएं गर्म होती जाती है और इसका सीधा असर बुजुर्गों और अस्थमा मरीजों की सेहत पर पड़ता है. इसके कारण समय से पहले उनकी मौत हो जाती है. यह शोध नेचर क्लाइमेट चेंज जर्नल में प्रकाशित किया गया है.