वजन घटाने वाली दवाएं कौन से डॉक्टर लिखते हैं? ये हैं पूरी शर्तें और जरूरी टेस्ट
वजन कम करने वाली दवाएं अब काफी लोकप्रिय हो गई हैं, लेकिन ये बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं ली जा सकतीं. एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और बेरियाट्रिक फिजिशियन इन्हें लिखते हैं. बीएमआई 27 या 30 से ऊपर होने और अन्य बीमारियों की स्थिति में ही ये दवाएं दी जाती हैं.
आजकल मोटापे की समस्या बढ़ने के साथ वजन घटाने वाली दवाओं की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. लोग अब जिम और डाइट के अलावा इन दवाओं का सहारा लेने लगे हैं. लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की साफ चेतावनी है कि ये दवाएं सामान्य दर्द निवारक की तरह नहीं हैं. इन्हें लेने से पहले पूरी मेडिकल जांच और डॉक्टरी परामर्श जरूरी है. गलत तरीके से इनका इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. आइए जानते हैं कि इन दवाओं को कौन लिख सकता है और क्या शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं.
कौन से डॉक्टर लिखते हैं पर्चा?
वजन घटाने वाली दवाओं को प्रिस्क्राइब करने के लिए सबसे पहले एंडोक्राइनोलॉजिस्ट यानी हार्मोन विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए. मोटापा अक्सर हार्मोन असंतुलन से जुड़ा होता है, इसलिए ये डॉक्टर सबसे बेहतर समझते हैं. इसके अलावा बेरियाट्रिक फिजिशियन और अनुभवी जनरल फिजिशियन भी मरीज की स्थिति देखकर ये दवाएं लिख सकते हैं. जिम ट्रेनर या बिना मेडिकल डिग्री वाले किसी भी व्यक्ति के कहने पर इन दवाओं का इस्तेमाल कभी न करें.
पर्चे से पहले जरूरी जांच
डॉक्टर दवा लिखने से पहले मरीज का पूरा मेडिकल चेकअप करते हैं. ब्लड टेस्ट से शुगर, कोलेस्ट्रॉल और लिवर की स्थिति जांचते हैं. थायरॉइड प्रोफाइल भी जरूरी है क्योंकि थायरॉइड की समस्या वजन बढ़ाने का बड़ा कारण हो सकती है. डॉक्टर बीएमआई कैलकुलेट करते हैं और ब्लड प्रेशर मॉनिटर करते हैं. कुछ मामलों में ईसीजी भी कराया जाता है ताकि दिल की सेहत का पता चल सके.
किन शर्तों पर मिलती है दवा?
ये दवाएं हर किसी को नहीं दी जातीं. पहली शर्त यह है कि बीएमआई 30 से ज्यादा हो या 27 से ज्यादा होने के साथ डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां भी हों. दूसरी शर्त यह है कि मरीज ने पहले डाइट और व्यायाम से वजन कम करने की पूरी कोशिश की हो. डॉक्टर तभी दवा शुरू करते हैं जब प्राकृतिक तरीके से फायदा न हो रहा हो. मरीज को दवा के साथ स्वस्थ जीवनशैली जारी रखने का वादा भी करना पड़ता है.
सावधानी बरतना बहुत जरूरी
वजन घटाने वाली दवाएं कोई जादुई इलाज नहीं हैं. इनके साइड इफेक्ट्स जैसे पेट की समस्या, जी मिचलाना या घबराहट हो सकती है. इसलिए डॉक्टर नियमित फॉलो-अप करते हैं. अगर कुछ हफ्तों में असर न दिखे या परेशानी हो तो दवा बदल दी जाती है. बिना डॉक्टरी सलाह के इन दवाओं का इस्तेमाल किडनी और हार्ट को नुकसान पहुंचा सकता है. हमेशा विशेषज्ञ की देखरेख में ही इनका उपयोग करें.