शरीर आ गया...आत्मा अभी भी मना रही छुट्टी? ट्रिप के बाद अपनाएं ये 3 आसान आदतें, लगने लगेगा काम में मन
पोस्ट हॉलिडे ब्लूज एक आम मानसिक स्थिति है, जिसमें लंबी छुट्टियों के बाद उदासी, आलस और काम में मन न लगने की समस्या होती है.
नई दिल्ली: काम के दबाव और रोजमर्रा की थकान से राहत पाने के लिए छुट्टियां सबसे अच्छा ब्रेक मानी जाती हैं. अधिकतर लोग छुट्टियों के बाद खुद को हल्का और ऊर्जावान महसूस करते हैं, लेकिन कुछ के लिए यही वापसी कठिन हो जाती है. लंबी मौज-मस्ती के बाद सामान्य जिंदगी में लौटते समय मन भारी लगना, उदास रहना और काम टालने की आदत पोस्ट हॉलिडे ब्लूज का संकेत हो सकती है.
मानसिक विशेषज्ञ इसे एक सामान्य बदलाव की प्रतिक्रिया बताते हैं, जिसे सही रणनीति से आसानी से संभाला जा सकता है. अगर छुट्टियों के बाद आपकी ऊर्जा अचानक कम हो गई है, तो घबराने की जरूरत नहीं. कुछ आसान आदतें और संतुलित सोच आपको फिर से फ्रेश और फोकस्ड बना सकती हैं.
धीरे-धीरे रूटीन में वापसी
छुट्टियों के बाद तुरंत तेज गति से काम शुरू करना मानसिक दबाव बढ़ा सकता है. बेहतर है कि पहले दिन सिर्फ जरूरी कामों की सूची बनाएं और उन्हें छोटे हिस्सों में पूरा करें. एक साथ कई जिम्मेदारियां लेने से बचें. काम को टुकड़ों में बांटने से मन को तैयारी का समय मिलता है और दिमाग पर बोझ कम महसूस होता है. यह बदलाव वापसी को सहज और तनाव-मुक्त बनाता है.
छुट्टी में भी सेल्फ-केयर
लंबी छुट्टियों में डेली रूटीन पूरी तरह छोड़ देना बड़ी गलती साबित हो सकती है. छुट्टी के दौरान भी नींद, पानी, स्किन-केयर और हल्की वॉक जैसी आदतें जारी रखें. यह शरीर और मन को संतुलन में रखती हैं. जब आप अपनी देखभाल को प्राथमिकता देते हैं, तो वेकेशन के बाद थकान और उदासी ज्यादा देर टिक नहीं पाती और आप मानसिक रूप से जल्दी एडजस्ट कर लेते हैं.
नई स्किल से बदलें मूड
अगर वेकेशन के बाद किसी काम में मन न लगे, तो कुछ नया सीखना बेहद मददगार होता है. नई स्किल दिमाग में ताजगी लाती है और पुरानी लाइफस्टाइल में लौटने को आसान बनाती है. यह मानसिक ठहराव को तोड़ती है और आत्मविश्वास बढ़ाती है. रोज 10–15 मिनट कुछ नया पढ़ें या प्रैक्टिस करें. इससे मन एक्टिव होता है और उदासी कम महसूस होती है.
परिवार-दोस्तों से बात
छुट्टियों के बाद मन में चल रही उलझनें अकेले रखने से मूड और खराब हो सकता है. परिवार और दोस्तों से खुलकर बात करें और अपनी भावनाएं साझा करें. यह ध्यान भटकाने वाली सोच को हल्का करता है. जब आप अपने करीबियों से संवाद करते हैं, तो दिमाग को भावनात्मक सहारा मिलता है और आप तेजी से सकारात्मक दिशा में लौटते हैं. बातचीत मानसिक ऊर्जा को रीसेट करने का आसान तरीका है.
हॉबी से रिफ्रेश करें दिमाग
तनाव कम करने के लिए हॉबी सबसे असरदार मानसिक थेरेपी मानी जाती है. संगीत, किताब, फिटनेस, कुकिंग या लेखन जैसे पसंदीदा काम 15–20 मिनट करने से दिमाग को आराम मिलता है और एकाग्रता बढ़ती है. इससे आप काम पर बेहतर फोकस कर पाते हैं. हॉबी आपकी मानसिक बैटरी को चार्ज करती है, जिससे वर्क लोड के बाद भी चेहरा और मन दोनों फ्रेश महसूस करते हैं.
Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. theindiadaily.com इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.