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बवासीर में क्या नहीं खाना चाहिए? जान लें नहीं तो करवाना पड़ जाएगा ऑपरेशन

बवासीर में राहत पाने के लिए जरूरी है कि आप फाइबर युक्त हल्का भोजन करें, खूब पानी पिएं और ऊपर बताए गए हानिकारक खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखें. यदि खानपान में सुधार नहीं किया गया तो यह समस्या इतनी गंभीर हो सकती है कि ऑपरेशन ही एकमात्र विकल्प रह जाएगा.

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Reepu Kumari

बवासीर (Piles) एक बेहद कष्टदायक और असहज रोग है, जिसमें मलद्वार के अंदर या बाहर नसें सूज जाती हैं और दर्द, जलन, खुजली तथा रक्तस्राव जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं. आमतौर पर यह समस्या खराब जीवनशैली, लंबे समय तक कब्ज रहने और असंतुलित खानपान के कारण होती है.

यदि सही समय पर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है, और आखिरकार ऑपरेशन करवाना पड़ सकता है. इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि बवासीर के दौरान किन खाद्य पदार्थों से दूरी बनाई जाए.

इन चीजों से करें परहेज

1. मिर्च-मसाले वाला भोजन
बवासीर की समस्या में तीखा, मसालेदार और तला-भुना खाना सबसे अधिक हानिकारक होता है. यह आंतों में जलन बढ़ाता है और मल त्याग को और अधिक पीड़ादायक बना देता है. अधिक मिर्च-मसाले से मलद्वार की नसों में सूजन बढ़ती है जिससे दर्द और खून निकलने की संभावना भी बढ़ जाती है.

2. मांसाहारी भोजन
भारी और पचने में कठिन मांसाहारी भोजन जैसे मटन, चिकन या तला हुआ मांस बवासीर के रोगियों के लिए नुकसानदेह होता है. यह पाचन में समय लेता है और कब्ज की समस्या को बढ़ाता है, जो बवासीर की जड़ है.

3. फास्ट फूड और जंक फूड
पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, समोसे आदि जैसे प्रोसेस्ड फूड्स में फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है और इनमें ट्रांस फैट ज्यादा होता है. ये पाचन क्रिया को धीमा करते हैं और कब्ज को बढ़ावा देते हैं.

4. कैफीन और शराब
चाय, कॉफी और शराब शरीर को डिहाइड्रेट करते हैं जिससे मल कठोर हो जाता है. इससे मलत्याग के दौरान अधिक जोर लगाना पड़ता है, जो बवासीर की स्थिति को और बिगाड़ सकता है.

5. रिफाइंड आटा (मैदा)
मैदे से बनी चीजें जैसे नूडल्स, ब्रेड, पेस्ट्री इत्यादि फाइबर रहित होती हैं और कब्ज का कारण बनती हैं. बवासीर के मरीजों को इससे पूरी तरह बचना चाहिए.

बवासीर में राहत पाने के लिए जरूरी है कि आप फाइबर युक्त हल्का भोजन करें, खूब पानी पिएं और ऊपर बताए गए हानिकारक खाद्य पदार्थों से दूरी बनाए रखें. यदि खानपान में सुधार नहीं किया गया तो यह समस्या इतनी गंभीर हो सकती है कि ऑपरेशन ही एकमात्र विकल्प रह जाएगा. सही समय पर सतर्कता बरतें और जीवनशैली में बदलाव लाकर इस पीड़ा से बचें.