पित्त की थैली में पथरी कैसे बनती है? जानें कारण, लक्षण और बचाव के आसान तरीके

पित्त रस में कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थ होते हैं. जब इनका संतुलन बिगड़ जाता है तो पथरी बनने लगती है. ज्यादातर मामलों में पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने से यह जमा होकर पथरी का रूप ले लेता है. कुछ लीवर संबंधी बीमारियों में बिलिरुबिन बढ़ने से भी पथरी हो सकती है.

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Gallbladder Stones: पित्त की थैली या गॉलब्लैडर लीवर के ठीक नीचे स्थित एक छोटी थैली होती है. इसमें पित्त रस जमा रहता है, जो खाने को पचाने में मदद करता है. कभी-कभी इसी पित्त रस में छोटे-छोटे कठोर टुकड़े बनने लगते हैं, जिन्हें पित्त की पथरी या गॉलस्टोन कहा जाता है. यह समस्या आजकल काफी आम हो गई है. ज्यादा वजन वाले लोग, महिलाएं और गलत खान-पान वाले लोगों में इसका खतरा अधिक रहता है.

पथरी क्यों बनती है?

पित्त रस में कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थ होते हैं. जब इनका संतुलन बिगड़ जाता है तो पथरी बनने लगती है. ज्यादातर मामलों में पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ने से यह जमा होकर पथरी का रूप ले लेता है. कुछ लीवर संबंधी बीमारियों में बिलिरुबिन बढ़ने से भी पथरी हो सकती है. अगर पित्त की थैली पूरी तरह खाली नहीं होती तो रस गाढ़ा होकर पथरी बना सकता है. मोटापा और असंतुलित खान-पान भी इस खतरे को बढ़ाते हैं.

लक्षण क्या हैं?

कई लोगों में छोटी पथरी होने पर कोई लक्षण नहीं दिखता. लेकिन जब पथरी किसी नली में फंस जाती है तो समस्या शुरू होती है. पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में तेज दर्द होना आम लक्षण है. यह दर्द पीठ या कंधे तक फैल सकता है. जी मिचलाना, उल्टी, खाना खाने के बाद पेट में भारीपन, पेट फूलना और खाना न पचना भी हो सकता है. कभी-कभी बुखार, ठंड लगना या आंखों व त्वचा का पीला पड़ना भी दिखता है.


जांच कैसे होती है?

तेज पेट दर्द के साथ बुखार या पीलिया जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें. डॉक्टर आमतौर पर पेट का अल्ट्रासाउंड करवाते हैं. इससे पथरी की स्थिति और आकार का पता चल जाता है. जरूरत पड़ने पर अन्य जांच भी की जा सकती हैं.

इलाज और बचाव

छोटी और बिना लक्षण वाली पथरी में कभी-कभी दवाओं से काम चल जाता है. लेकिन बड़ी या परेशानी पैदा करने वाली पथरी में अक्सर ऑपरेशन से थैली निकालनी पड़ती है. यह सुरक्षित प्रक्रिया मानी जाती है.

बचाव के लिए तला-भुना और ज्यादा तेल वाला खाना कम करें. फल, सब्जियां और फाइबर युक्त भोजन ज्यादा खाएं. नियमित व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें. पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं. ये छोटी आदतें पथरी के खतरे को काफी कम कर सकती हैं. सही खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से बचा जा सकता है. कोई लक्षण दिखे तो देर न करें.