महिलाओं के लिए चेतावनी! समय से पहले मेनोपॉज बढ़ा सकता है दिल की बीमारियों का खतरा
एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार 40 वर्ष से पहले या कम उम्र में मेनोपॉज होने वाली महिलाओं में कुछ रोगों का खतरा बढ़ सकता है. चलिए जानते हैं क्या दी गई है चेतावनी.
नई दिल्ली: महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन यदि यह सामान्य उम्र से पहले शुरू हो जाए तो इसके गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव सामने आ सकते हैं. हाल ही में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पाया गया है कि समय से पहले मेनोपॉज का अनुभव करने वाली महिलाओं में हृदय रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी महिलाओं को हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं का अधिक जोखिम हो सकता है.
यह अध्ययन प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेट ऑब्सटेट्रिक्स, गाइनेकोलॉजी एंड विमेंस हेल्थ में प्रकाशित हुआ है. शोध 26 देशों की 1.11 लाख से अधिक महिलाओं के आंकड़ों पर आधारित है. अध्ययन के अनुसार जिन महिलाओं में 40 से 44 वर्ष की उम्र के बीच मेनोपॉज हुआ, उनमें सामान्य उम्र में मेनोपॉज होने वाली महिलाओं की तुलना में हृदय रोगों का खतरा 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक पाया गया.
क्या कहते हैं आंकड़े?
भारत से जुड़े आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं. अध्ययन में शामिल 7,872 भारतीय महिलाओं में से 1,445 महिलाओं यानी 18.4 प्रतिशत ने 40 वर्ष की आयु से पहले मेनोपॉज का अनुभव किया. इसके अलावा 25.3 प्रतिशत महिलाओं में 40 से 44 वर्ष की आयु के बीच मेनोपॉज देखा गया. इस तरह लगभग 43.6 प्रतिशत भारतीय महिलाओं में समय से पहले या कम उम्र में मेनोपॉज की स्थिति सामने आई.
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विशेषज्ञों के अनुसार मेनोपॉज से पहले महिलाओं के शरीर में मौजूद एस्ट्रोजन हार्मोन हृदय और रक्त वाहिकाओं को सुरक्षा प्रदान करता है. यह हार्मोन शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करता है. लेकिन मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर तेजी से घटने लगता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है. कई मामलों में महिलाओं में हार्ट अटैक का जोखिम पुरुषों के बराबर पहुंच जाता है.
अध्ययन में क्या आया सामने?
अध्ययन में यह भी पाया गया कि दक्षिण एशिया की महिलाओं में मेनोपॉज की औसत उम्र वैश्विक औसत से कम है. जहां दुनिया में मेनोपॉज की औसत उम्र 47.4 वर्ष दर्ज की गई, वहीं दक्षिण एशिया में यह केवल 44.7 वर्ष रही. विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतर स्वास्थ्य संबंधी कई चुनौतियों को जन्म दे सकता है.
डॉक्टरों के अनुसार तनाव, धूम्रपान, खराब खानपान, नींद की कमी, प्रदूषण, डायबिटीज और सेकेंड हैंड स्मोकिंग जैसे कारक समय से पहले मेनोपॉज के जोखिम को बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा एनीमिया, कम उम्र में विवाह, बार-बार गर्भधारण और पोषण की कमी भी महत्वपूर्ण कारण माने जाते हैं. विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि महिलाओं में मेनोपॉज से जुड़े जोखिमों की पहचान के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और हृदय रोगों की स्क्रीनिंग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.