JEE एडवांस में 2 अंकों से चूके फिर भी नहीं मानी हार; अब ISRO में साइंटिस्ट बने मेरठ के संकेत कुमार
मेरठ के संकेत कुमार ने जेईई एडवांस में दो अंकों से असफल होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी. सेल्फ स्टडी और लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने इसरो में साइंटिस्ट-इंजीनियर पद हासिल कर लिया.
मेरठ: सफलता अक्सर उन्हीं लोगों के कदम चूमती है जो असफलता के बाद भी अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटते. मेरठ के रहने वाले संकेत कुमार इसकी मिसाल बनकर सामने आए हैं. जेईई एडवांस परीक्षा में महज दो अंकों से चूकने के बाद उन्होंने निराश होने के बजाय खुद को और बेहतर बनाने का फैसला किया. एक साल तक सेल्फ स्टडी, ऑनलाइन लेक्चर और लगातार प्रैक्टिस के सहारे तैयारी की और आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो में साइंटिस्ट-इंजीनियर बनने का सपना साकार कर दिखाया.
असफलता को बनाया सफलता की सीढ़ी
दीवान पब्लिक स्कूल के पूर्व छात्र संकेत कुमार ने वर्ष 2021 में जेईई मेन परीक्षा पास की थी और जेईई एडवांस में भी शामिल हुए थे. हालांकि अंतिम परिणाम में वह केवल दो अंकों से पीछे रह गए. यह झटका किसी भी छात्र के लिए बड़ा हो सकता था लेकिन संकेत ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उन्होंने एक साल का ड्रॉप लिया और बिना किसी कोचिंग संस्थान की मदद के तैयारी शुरू कर दी. यूट्यूब लेक्चर, अध्ययन सामग्री और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के सहारे उन्होंने अपनी रणनीति तैयार की. उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2022 में उन्होंने जेईई मेन और जेईई एडवांस दोनों परीक्षाएं सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर लीं.
अलग राह चुनी, वहीं मिली पहचान
जेईई में सफलता के बाद संकेत को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIST) में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में प्रवेश मिला. यहां उन्होंने भीड़ से अलग रास्ता चुना. जहां अधिकांश छात्र प्रोपल्शन और एयरोडायनामिक्स जैसे लोकप्रिय विषयों की ओर बढ़े, वहीं संकेत ने वाइब्रेशन एवं एकॉस्टिक्स को अपनी विशेषज्ञता का क्षेत्र बनाया. पूरे बैच में इस विषय को चुनने वाले वह अकेले छात्र थे. यही निर्णय आगे चलकर उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ. इसरो के इंटरव्यू के दौरान उनके विषय चयन और तकनीकी समझ ने चयनकर्ताओं को प्रभावित किया, जिससे उन्हें बड़ा लाभ मिला.
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जापान से इसरो तक का सफर
संकेत की रुचि केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने शोध और तकनीकी परियोजनाओं में भी सक्रिय भागीदारी निभाई. वर्ष 2025 में उन्हें वाइब्रोएकॉस्टिक क्षेत्र में इंटर्नशिप का अवसर मिला. इसके बाद 2026 में उन्होंने जापान में तीन माह तक एक इंजीनियरिंग परियोजना पर काम किया, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्राप्त हुआ.
8.2 सीजीपीए हासिल करने के बाद उन्हें इसरो सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड के इंटरव्यू में शामिल होने का अवसर मिला. कई चरणों की चयन प्रक्रिया पार करने के बाद उनका चयन तमिलनाडु स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स, महेंद्रगिरि में साइंटिस्ट-इंजीनियर पद के लिए हुआ. संकेत का मानना है कि लगन, धैर्य और सही दिशा में की गई मेहनत किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकती है.