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'कल तक भोग विलास कर रहे थे...', बाबा रामदेव का ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाने पर फूटा गुस्सा, वीडियो में देखें क्या कहा ?

बाबा रामदेव ने चल रहे महाकुंभ में किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर के रूप में अभिनेत्री ममता कुलकर्णी के अभिषेक पर सवाल उठाया है. रामदेव ने कहा, "सनातन का महान कुंभ पर्व, जहां हमारी जड़ें जुड़ी हुई हैं, एक भव्य उत्सव है."

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Mamta Kulkarni Controversy: योग गुरु रामदेव ने चल रहे महाकुंभ में किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर के रूप में अभिनेत्री ममता कुलकर्णी के अभिषेक पर सवाल उठाया है. रामदेव ने कहा, "सनातन का महान कुंभ पर्व, जहां हमारी जड़ें जुड़ी हुई हैं, एक भव्य उत्सव है. यह एक पवित्र त्योहार है. कुछ लोग कुंभ के नाम पर अश्लीलता, नशा और अनुचित व्यवहार को जोड़ रहे हैं. यह महाकुंभ का असली सार नहीं है."

रामदेव का ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाने पर फूटा गुस्सा

बाबा रामदेव ने आगे कहा, "कुछ लोग, जो कल तक सांसारिक सुखों में लिप्त थे, अचानक संत बन जाते हैं या एक ही दिन में महामंडलेश्वर जैसी उपाधि प्राप्त कर लेते हैं." कई संतों ने  ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाए जाने का विरोध किया है. महामंडलेश्वर एक ऐसी उपाधि है जो आध्यात्मिक नेताओं को दी जाती है जो धार्मिक प्रवचन और सामाजिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

ममता कुलकर्णी को मिली 'माई ममता नंद गिरी' की नई पहचान

24 जनवरी को 52 वर्षीय ममता कुलकर्णी ने 'माई ममता नंद गिरी' की नई पहचान बनाई है. उन्होंने सबसे पहले किन्नर अखाड़े में संन्यास लिया और फिर उसी अखाड़े में उन्हें नया नाम 'माई ममता नंद गिरी' मिला. किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि उर्फ ​​टीना मां ने पीटीआई को बताया कि कुलकर्णी ने शुक्रवार को गंगा नदी के तट पर अपना पिंडदान किया. 

'साल 2000 में की थी अपनी तपस्या शुरू'

वहीं ममता कुलकर्णी ने बताया, "मैंने 2000 में अपनी तपस्या शुरू की थी और मैंने लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को अपना पट्टागुरु चुना क्योंकि आज शुक्रवार है... यह महा काली (देवी काली) का दिन है. कल मुझे महामंडलेश्वर बनाने की तैयारी चल रही थी. लेकिन आज मां शक्ति ने मुझे निर्देश दिया कि मैं लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को चुनूं क्योंकि वह व्यक्ति अर्धनारीश्वर का साक्षात रूप है. अर्धनारीश्वर द्वारा मेरा पट्टाभिषेक करने से बड़ी उपाधि और क्या हो सकती है."

बता दें कि 1990 के दशक में ममता कुलकर्णी ने ‘करण अर्जुन’ और ‘बाजी’ जैसी हिट फिल्मों से प्रसिद्धि पाई है. 2000 की शुरुआत में उन्होंने इंडस्ट्री छोड़ दी और विदेश चली गईं, जहां उन्होंने लाइमलाइट से दूर अपना जीवन बिताया.