नाना पाटेकर का रात 11:30 बजे क्यों हुआ अंतिम संस्कार? बेटे मल्हार ने बताई वजह

नाना पाटेकर के निधन से उनके चाहने वालों में शोक है. उनके फार्महाउस पर रात करीब 11:30 बजे पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया.

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Reepu Kumari

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने उनके प्रशंसकों को गमगीन कर दिया. पर्दे पर अपने दमदार अभिनय और अलग अंदाज से पहचान बनाने वाले अभिनेता को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. पुणे के बाहरी इलाके में स्थित उनके फार्महाउस पर गुरुवार देर रात पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. रात करीब 11:30 बजे उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने उन्हें मुखाग्नि दी.

बेटे मल्हार ने बताई देर रात अंतिम संस्कार की वजह

नाना पाटेकर का निधन गुरुवार सुबह गोवा में हुआ था. इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को पुणे के बाहरी इलाके में स्थित फार्महाउस लाया गया. परिवार को उम्मीद थी कि पार्थिव शरीर समय से पहुंच जाएगा, लेकिन इसमें अपेक्षा से अधिक समय लग गया. अंतिम संस्कार के बाद पत्रकारों से बातचीत में मल्हार ने बताया कि सुबह हुई इस दुखद घटना के बाद काफी समय बीत चुका था. इसी वजह से परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला किया.

'अपने काम से अमर हो जाते हैं नाना साहब'

पिता को खोने के दुख के बीच मल्हार पाटेकर ने उनके जीवन और विरासत को भी याद किया. उन्होंने कहा कि नाना साहब जैसे लोग वास्तव में कभी दुनिया से विदा नहीं होते, क्योंकि उनका काम उन्हें अमर बना देता है. मल्हार के मुताबिक, उनके पिता की सोच हमेशा मानवता के लिए काम करने की रही. वह अक्सर लोगों से एकजुट होकर दुनिया को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने की बात कहते थे. उनके विचार परिवार के लिए हमेशा प्रेरणा बने रहेंगे.


नाम फाउंडेशन के जरिए जारी रहेगा समाजसेवा का काम

मल्हार ने बताया कि नाना पाटेकर की सामाजिक सोच उनके काम में भी दिखाई देती थी. नाम फाउंडेशन के माध्यम से पानी के क्षेत्र में पहले से काम किया जा रहा था. इसके अलावा कश्मीर में शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े बड़े स्तर के प्रयास भी शुरू किए गए थे. मल्हार ने कहा कि उनके पिता जाने से पहले सभी को उनकी जिम्मेदारियां सौंप गए थे. परिवार का प्रयास रहेगा कि उनके द्वारा शुरू किए गए सामाजिक कार्य आगे भी जारी रहें.

गोवा में बिगड़ी थी तबीयत, अस्पताल में बचाने की कोशिश

नाना पाटेकर का निधन गोवा स्थित उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने के बाद हुआ. खबर के मुताबिक, गुरुवार तड़के बेचैनी महसूस होने पर उन्होंने अपने एक मित्र को फोन किया था. इसके बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की. अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर साल्कर ने समाचार एजेंसी एएनआई को उनके निधन की पुष्टि की थी. उनके जाने से भारतीय सिनेमा ने एक चर्चित और प्रभावशाली कलाकार खो दिया.