नई दिल्ली: फिल्म 'द केरल स्टोरी' के सीक्वल द केरल स्टोरी-2- गोज बियॉन्ड को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. फिल्म के पहले भाग के रिलीज के समय भी जबरदस्त बवाल देखने को मिला था और इसे प्रोपेगंडा मूवी कहा गया था, वही अब जबकि इसका दूसरा भाग रिलीज होने की कगार पर है, फिल्म को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है. इसी क्रम में अब केरल कांग्रेस ने भी फिल्म के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह फिल्म केरल को गलत तरीके से दर्शाती है और राज्य की छवि को धूमिल कर रही है.
बता दें कि एक तरफ जहां फील के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह और निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह द्वारा केरल में धर्मांतरण को वास्तविक मुद्दा कहा जा रहा है और फिल्म के इन्ही घटनाओं से प्रेरित होने की बात कही जा रही है, वही मुस्लिम संगठनों और कांग्रेस का कहना है कि एक सोची-समझी साजिश के तहत के एक समुदाय विशेष की छवि को गलत अर्थों में पेश किया जा रहा है, जिससे राज्य की छवि भी धूमिल हो रही है. फिल्म 27 फ़रवरी को रिलीज होनी है, लेकिन उससे पहले जिस तरह से बवाल बढ़ता जा रहा है, उसे देखकर ऐसा लगा नहीं कि रिलीज़ की राह आसान होने वाली है.
दरअसल, फिल्म रिलीज से पहले निर्माता द्वारा एक विशेष आयोजन रखा गया. इस आयोजन में फिल्म के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह और निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह ने कुछ महिलाओं को पेश करते हुआ कि ये महिलाएं देश के विभिन्न हिस्सों से आई हैं और उन्होंने अपनी आपबीती साझा की है. निर्माताओं का रुख है कि यह फिल्म वास्तविक जीवन की घटनाओं और जमीनी सच्चाइयों पर आधारित है.
इस आयोजन के तुरंत बाद केरल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर मोर्चा खोल दिया. कांग्रेस ने फिल्म की टीम पर आरोप लगाया कि यह फिल्म केवल केरल की छवि खराब करने के लिए लक्षित है. पार्टी ने दावा किया कि पेश की गई 30 महिलाओं में से एक भी केरल की नहीं थी. कांग्रेस के अनुसार, ये महिलाएं बंगाल, बिहार, राजस्थान, जम्मू, महाराष्ट्र, दिल्ली और नोएडा जैसे क्षेत्रों से थीं.
कांग्रेस ने तंज कसते हुए लिखा- 'इन्हें केरल से एक भी महिला नहीं मिली. क्या अब भी किसी को सबूत चाहिए कि यह फिल्म केरल की छवि धूमिल करने के लिए है?' इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 'बीफ खाने' का मुद्दा है, तो भाजपा गोवा या पूर्वोत्तर राज्यों पर फिल्म क्यों नहीं बनाती, जहां यह कानूनी है.
विपुल शाह और उनकी टीम अपनी फिल्म को वास्तविकता से प्रेरित बता रहे हैं, लेकिन आलोचकों का मानना है कि यह राज्य विशेष को गलत तरीके से चित्रित करती है. फिल्म 27 फरवरी, 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है, लेकिन इसकी रिलीज को रोकने के लिए कई याचिकाएं दायर की गई हैं. रिपोर्टों के अनुसार, केरल उच्च न्यायालय बुधवार को फिल्म देखने के बाद इस पर अपना फैसला सुना सकता है.