4 साल की उम्र में गाए जिंगल्स, 17 में मिला पहला प्लेबैक; आज करोड़ों दिलों पर राज करते हैं ये सिंगर
सिंगर शान आज अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं. मध्य प्रदेश के खंडवा में जन्मे शान का परिवार कई पीढ़ियों से संगीत से जुड़ा रहा है. उन्होंने महज 4 साल की उम्र में जिंगल्स गाने शुरू कर दिए थे, लेकिन 14 साल की उम्र में पिता मानस मुखर्जी को खोने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया.
बॉलीवुड के खूबसूरत और सुरीली आवाज वाले सिंगर्स की बात हो तो शान का नाम जरूर लिया जाता है. अपनी आवाज से लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले शान आज अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं. उन्होंने हिंदी सिनेमा को कई ऐसे गाने दिए हैं, जिन्हें आज भी लोग सुनना पसंद करते हैं.
शान का असली नाम शांतनु मुखर्जी है. उनका जन्म 30 सितंबर 1972 को मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ था. संगीत उनके लिए सिर्फ करियर नहीं बल्कि परिवार की विरासत रहा है. उनके दादा जाहर मुखर्जी गीतकार थे, जबकि पिता मानस मुखर्जी म्यूजिक डायरेक्टर और मां सोनाली मुखर्जी सिंगर थीं. उनकी बहन सागरिका मुखर्जी भी सिंगिंग की दुनिया से जुड़ी हैं.
4 साल की उम्र से शुरू हुआ संगीत का सफर
शान को संगीत का माहौल घर में ही मिला. यही वजह थी कि उन्होंने बेहद कम उम्र में गाना शुरू कर दिया था. महज 4 साल की उम्र में वह विज्ञापनों के लिए जिंगल्स गाने लगे थे. बचपन से ही संगीत के करीब रहने वाले शान ने धीरे धीरे अपनी आवाज को निखारा और आगे चलकर प्लेबैक सिंगिंग की दुनिया में कदम रखा.
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14 साल की उम्र में खोया पिता को
शान की जिंदगी में एक बड़ा दुख तब आया जब उन्होंने कम उम्र में अपने पिता को खो दिया. उनके पिता मानस मुखर्जी का 18 अक्टूबर 1986 को निधन हुआ था. उस समय शान सिर्फ 14 साल के थे. पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां सोनाली मुखर्जी ने संभाली. उन्होंने परिवार को चलाने के लिए लंबे समय तक कोरस सिंगर के तौर पर काम किया. बताया जाता है कि उन्होंने 70 के दशक से लेकर साल 2000 तक अपनी आवाज के जरिए परिवार का साथ दिया.
17 साल में शुरू किया प्लेबैक सिंगिंग
पिता को खोने के कुछ साल बाद शान ने बतौर प्लेबैक सिंगर अपनी पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया. साल 1989 में उन्हें फिल्म परिंदा के गाने कितनी है प्यारी प्यारी में अपनी आवाज देने का मौका मिला. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. हिंदी के साथ साथ शान ने बंगाली, कन्नड़, नेपाली, मलयालम और उर्दू जैसी भाषाओं में भी गाने रिकॉर्ड किए.
शान ने अपने करियर के शुरुआती दौर में कई विज्ञापन जिंगल्स और रीमिक्स गाने गाए. उन्हें आरडी बर्मन के मशहूर गाने रूप तेरा मस्ताना के रीमिक्स से भी काफी पहचान मिली. इसके बाद साल 1999 में उनका एल्बम तनहा दिल रिलीज हुआ. इस एल्बम को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला और शान की पहचान एक सोलो सिंगर के रूप में और मजबूत हो गई. साल 2000 में उन्हें तनहा दिल के लिए MTV Asia Music का बेस्ट सोलो एल्बम अवॉर्ड भी मिला.
'चांद सिफारिश' से 'जब से तेरे नैना' तक
शान ने अपने करियर में कई बड़े बॉलीवुड सितारों के लिए अपनी आवाज दी. उनके लोकप्रिय गानों में चांद सिफारिश, बूम बूम बोले, वो लड़की है कहां, आओ मिलो चलो, सुनो ना, जब से तेरे नैना और हे सोना जैसे गाने शामिल हैं. इन गानों ने शान को बॉलीवुड के सबसे पसंद किए जाने वाले मेल प्लेबैक सिंगर्स में शामिल कर दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, शान अपने लंबे करियर में अब तक हजारों गानों को अपनी आवाज दे चुके हैं. उन्होंने फिल्मों के अलावा अलग अलग भाषाओं और म्यूजिक प्रोजेक्ट्स में भी काम किया है.