बॉलीवुड में किसी भी सक्सेस के लिए जितना योगदान पर्दे के सामने काम करने वाले कलाकारों का होता है, शायद उससे भी ज्यादा योगदान पर्दे के पीछे काम करने वाले कलाकारों का होता है. कैमरा, लाइट्स, मेकअप और गीतकार की मेहनत के बाद एक फिल्म या उस फिल्म के गाने हिट होते हैं. लेकिन शायद उनकी मेहनत का फल उतना नहीं मिल पाता है.
जब कोई गाना हिट होता है तो उसका क्रेडिट उस गाने के सिंगर को चला जाता है, लेकिन क्या आपने सोचा है कि यह गाना लिखा ही नहीं जाता तो कोई गाता कैसे? 'एक प्यार का नगमा है', 'जिंदगी की न टूट लड़ी' जैसे सदाबहार गाने लिखने वाले गीतकार संतोष आनंद ने बॉलीवुड के लिए सैंकड़ों गाने लिखे हैं, लेकिन उनकी मेहनत का फल शायद उतना मिल नहीं पाया.
संतोष आनंद का जीवन काफी संघर्षों से भरा रहा है. इतनी मेहनत के बाद भी संतोष अपने परिवार को वो सब नहीं दे पाए जो कई लोगों के लिए काफी सामान्य बात है. 2015 में उनके जीवन की सबसे खतरनाक घटना तब घटी, जब उनके बेटे और बहू ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी. हालांकि इससे पहले भी जीवन ने उन्हें एक कभी ना भरने वाला दर्द तब दिया था जब जवानी में ही उनका एक पैर चला गया. हालांकि इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और जीवन के इस जंग को न केवल लड़ा बल्कि जीता भी.
उन्होंने बॉलीवुड को कई हिट गाने दिए, हालांकि फिर भी उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा. संतोष मूल रूप से यूपी के बुलंदशहर के रहने वाले हैं. शुरू से ही उन्हें कविता और शायरी लिखने में दिलचस्पी थी, जिसके लिए अक्सर वह कवि सम्मेलन में हिस्सा लेते रहते थे.
कवि सम्मेलनों के दौरान ही उनकी मुलाकात एक्टर मनोज कुमार से हुई. उन्होंने संतोष को मुंबई बुलाया, जिसके बाद संतोष ने बॉलीवुड के लिए कई गाने लिखे. हालांकि इसके बाद भी उन्हें वो ऊंचाई नहीं मिली, जिसके वे हकदार थे. उन्होंने 1998 में बॉलीवुड के लिए आखिरी गाना लिखा और उसके बाद कभी बॉलीवुड की ओर नहीं गए. संतोष दिल्ली वापस लौटकर अपनी बेटी शैलजा के घर पर रहने लगे. इस दौरान उन्होंने पैसा कमाने के लिए कवि सम्मेलनों का सहारा लिया.
आर्थिक लड़ाई लड़ने के बीच ही उन्हें एक और झटका लगा. मथुरा पुलिस ने संतोष को कॉल कर के बताया कि उनके बेटे और बहू का एक्सिडेंट हो गया. हालांकि जब बाद में जांच की गई तो पता चला कि दोनों ने सुसाइड किया. इस घटना में संतोष की पोती बच गई.
बेटे के पास से मिले सुसाइड नोट में पता चाल कि वह अपने संस्थान द्वारा लगाए गए झूठे गंभीर आरोपों से थक चुके थे. इस मामले में कई सालों तक जांच चली लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली. इसके बाद संतोष पूरी तरह टूट गए और अपनी बेटी के साथ ही रहने लगे. उनकी बेटी उनके वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करती रहती हैं. जिसमें संतोष आज जीवन को उसी हौसले से जवाब देते नजर आते हैं.