सरकारी परिवार का बेटा कैसे बना सिनेमा का ‘कॉमेडियन’, किसकी वजह से रखा फिल्मों में कदम?
Sanjay Mishra Birthday: बॉलीवुड के बेहतरीन कलाकार संजय मिश्रा ने अपनी पहचान मेहनत और अदाकारी से बनाई है. सरकारी परिवार से ताल्लुक रखने वाले संजय मिश्रा की जड़ें बिहार से जुड़ी हैं, लेकिन उन्होंने सिनेमा में वो मुकाम हासिल किया, जो किसी मिसाल से कम नहीं. दिलचस्प बात यह है कि उन्हें एक्टिंग का शौक अपनी दादी से मिला, जो पटना रेडियो में गाना गाती थीं.
Sanjay Mishra Birthday: ‘हर कहानी का हीरो शाहरुख खान नहीं होता, कभी-कभी आपकी तरह, मेरी तरह, एक आम इंसान भी होता, अपनी कहानी का हीरो.’ यह मशहूर डायलॉग जब संजय मिश्रा ने फिल्म ‘अंग्रेजी मीडियम’ में बोला था, तब हर किसी के दिल को छू गया था. आज 6 अक्टूबर को संजय मिश्रा अपना जन्मदिन मना रहे हैं. एक्टर के जन्मदिन पर उनके कुछ किस्से याद करते हैं जिसमें उन्होंने पर्दे पर आम आदमी की कहानी को असाधारण बना दिया.
6 अक्टूबर को जन्मे संजय मिश्रा आज अपना 61वां जन्मदिन मना रहे हैं. करीब तीन दशकों से अधिक समय से वो बॉलीवुड की दुनिया में सक्रिय हैं और हर बार अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीतते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1995 में फिल्म ‘ओह डार्लिंग! ये है इंडिया’ से की थी, जिसमें वो सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ नजर आए थे. हालांकि, फिल्मों में कदम रखने से पहले उन्होंने टेलीविजन की दुनिया में अपनी पहचान बनाई.
टीवी से फिल्मों तक का सफर
संजय मिश्रा का पहला टेलीविजन शो ‘चाणक्य’ (1991) था. यही वह शो था जिससे उन्होंने कैमरे के सामने अपनी असली यात्रा शुरू की. माना जाता है कि जब उन्होंने इस सीरियल का पहला शॉट दिया था, तब उसे पूरा करने में 20 टेक्स लगे थे. लेकिन उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें धीरे-धीरे इंडस्ट्री के उन कलाकारों की कतार में खड़ा कर दिया जो अपनी असली और सजीव अदाकारी के लिए जाने जाते हैं.
सरकारी परिवार से ताल्लुक फिर भी चुना अभिनय
संजय मिश्रा का जन्म बिहार के दरभंगा में हुआ, लेकिन उनका बचपन वाराणसी में बीता. उनके परिवार में सरकारी नौकरियों का इतिहास रहा है. उनके पिता सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (IB Ministry) में कार्यरत थे, जबकि उनके दादा एक जिले के डीएम रह चुके थे. ऐसे परिवार में जहां स्थिर करियर और सरकारी सेवा को प्राथमिकता दी जाती थी, संजय मिश्रा ने अभिनय को चुना और अपने सपनों के पीछे चल पड़े.
संजय मिश्रा की दादी पटना रेडियो में गाना गाती थीं. वो बचपन में स्कूल की छुट्टियों में दादी के पास जाया करते थे और उनकी गायकी से बहुत प्रभावित थे. यहीं से उनके अंदर कला के प्रति रुचि जागी और उन्होंने तय कर लिया कि वो भी रचनात्मक क्षेत्र में जाएंगे. दादी की प्रेरणा ने ही उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD), दिल्ली तक पहुंचाया. उन्होंने 1991 में एनएसडी से ग्रेजुएशन पूरा किया और फिर पूरी तरह अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया.