'शोहरत चाहिए या सम्मान...', जान्हवी कपूर विवाद पर कूदी नित्या मेनन, बोलीं- 'कोई भी पूरी तरह बेबस नहीं होता'
एक्ट्रेस नित्या मेनन ने फिल्म पेड्डी को लेकर चल रही बहस पर अपनी राय रखी है. उन्होंने कहा कि फिल्मों में महिलाओं को ऑब्जेक्ट की तरह दिखाना गलत है, लेकिन कलाकारों को अपनी सीमाएं तय करने और अपनी बात मजबूती से रखने की क्षमता भी होनी चाहिए.
फिल्म पेड्डी को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया और फिल्म जगत में बहस जारी है. चर्चा का केंद्र यह सवाल है कि क्या फिल्म में एक्ट्रेस जान्हवी कपूर को जरूरत से ज्यादा ग्लैमरस तरीके से पेश किया गया है. इसी बीच एक्ट्रेस नित्या मेनन ने इस मुद्दे पर अपना रिएक्शन दिया है. हालांकि नित्या मेनन ने साफ किया कि उन्होंने अभी तक पेड्डी नहीं देखी है, लेकिन उन्होंने फिल्मों में महिलाओं को सामान की तरह दिखाने को लेकर अपनी सोच खुलकर साझा की. उन्होंने कहा कि वह इस तरह की प्रस्तुति के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन कलाकारों को अपनी सीमाएं तय करने और अपनी बात रखने का अधिकार भी होना चाहिए.
सिनेमा के कमर्शियलाइेशन पर उठाए सवाल
एक इंटरव्यू में बातचीत करते हुए नित्या मेनन ने कहा कि सिनेमा के कमर्शियलाइेशन ने इस तरह की चीजों को बढ़ावा दिया है. उनके अनुसार जो चीजें दर्शकों को आकर्षित करती हैं और व्यावसायिक रूप से सफल होती हैं, अक्सर फिल्म मेकर उसी फार्मूले को दोहराने लगते हैं. यही वजह है कि कई बार फिल्मों में ऐसे सीन और प्रस्तुति देखने को मिलती है जिन पर बहस छिड़ जाती है. उन्होंने माना कि कुछ मामलों में यह प्रवृत्ति सीमा से आगे बढ़ जाती है और इस पर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है.
कलाकारों को तय करनी चाहिए अपनी सीमाएं
नित्या मेनन का मानना है कि कलाकारों को अपने पेशेवर जीवन में साफ तौर से सीमाएं तय करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी भी एक्टर या एक्ट्रेस को यह अधिकार है कि वह अपनी सुविधा और सोच के मुताबिक फैसला ले. अगर किसी कलाकार को लगता है कि किसी दृश्य या प्रस्तुति से वह असहज महसूस कर रहा है, तो उसे अपनी बात साफ तौर से रखनी चाहिए. उनके अनुसार कलाकारों को यह कहने में सक्षम होना चाहिए कि वह किसी विशेष तरीके से प्रस्तुत नहीं होना चाहते.
नित्या मेनन ने बताया कि अपने करियर की शुरुआत से ही उन्होंने यह साफ रखा है कि वह किस तरह के किरदार और दृश्य करना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि वह कभी भी ऐसा काम करने के बारे में नहीं सोच सकतीं जिसमें उन्हें असहजता महसूस हो. उनके लिए एक कलाकार के रूप में अपनी पहचान और मूल्यों को बनाए रखना ज्यादा जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि हर कलाकार को यह तय करना होता है कि उसके लिए प्राथमिकता क्या है और वह किस तरह की छवि के साथ आगे बढ़ना चाहता है.
शोहरत से ज्यादा जरूरी है अपनी पसंद
एक्ट्रेस ने कहा कि कुछ फिल्में और अवसर ऐसे हो सकते हैं जो उन्हें इसलिए नहीं मिलते क्योंकि वह कुछ खास तरह का काम करने से बचती हैं. लेकिन उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं है. उनके लिए लोकप्रियता या स्टारडम से ज्यादा जरूरी अपनी पसंद और अपने सिद्धांत हैं. उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति केवल टॉप स्टार बनने के लिए हर तरह का काम करने को तैयार है तो वह उसका व्यक्तिगत फैसला है. हर कलाकार को अपने निर्णयों की जिम्मेदारी खुद उठानी होती है.