IPL 2026

'तुम हंसते हुए भद्दी दिखती हो', कास्टिंग डायरेक्टर के इस कमेंट से उड़ गई थी नेहा धूपिया की रातों की नींद

नेहा धूपिया ने बताया कि जब वह इंडस्ट्री में बिल्कुल नई थीं, तब वह एक टीवी शो के ऑडिशन के लिए गई थीं. उसी दौरान एक कास्टिंग डायरेक्टर ने उन्हें देखकर कहा कि वह मुस्कुराते समय अच्छी नहीं लगतीं.

x
Sagar Bhardwaj

फिल्मी दुनिया बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, उसके पीछे उतना ही दबाव और संघर्ष छिपा होता है. खासकर नए कलाकारों को कई बार ऐसे शब्द सुनने पड़ते हैं, जो उनकी सोच और आत्मविश्वास दोनों को बदल देते हैं. अभिनेत्री नेहा धूपिया ने हाल ही में अपने जीवन का एक ऐसा ही अनुभव साझा किया, जिसने उन्हें अंदर तक हिला दिया था. एक साधारण सी टिप्पणी ने उनकी मुस्कान छीन ली और वह कई साल तक खुद को खुलकर जी नहीं पाईं.

मुस्कान पर लगा था सवाल

नेहा धूपिया ने बताया कि जब वह इंडस्ट्री में बिल्कुल नई थीं, तब वह एक टीवी शो के ऑडिशन के लिए गई थीं. उसी दौरान एक कास्टिंग डायरेक्टर ने उन्हें देखकर कहा कि वह मुस्कुराते समय अच्छी नहीं लगतीं. यह बात सुनकर नेहा अंदर से टूट गईं. उस समय वह अपने करियर की शुरुआत कर रही थीं और खुद को साबित करने की कोशिश में लगी थीं. किसी नए कलाकार के लिए ऐसे शब्द बहुत गहरा असर छोड़ते हैं. नेहा ने कहा कि उस एक टिप्पणी ने उनकी सोच बदल दी और उन्होंने कई साल तक कैमरे के सामने मुस्कुराना लगभग बंद कर दिया. यहां तक कि मिस इंडिया जीतने के बाद भी उनकी तस्वीरों में मुस्कान दिखाई नहीं देती थी.

कई साल तक रहा असर

नेहा ने खुलकर स्वीकार किया कि उस घटना का असर करीब आठ से दस साल तक उनके अंदर बना रहा. वह खुद को लेकर असहज महसूस करने लगी थीं. उन्होंने कहा कि जब कोई बार-बार आपकी कमजोरी बताता है, तो इंसान धीरे-धीरे उसी पर विश्वास करने लगता है. उस दौर में उन्होंने खुद को संभालने की बहुत कोशिश की, लेकिन आत्मविश्वास लौटने में लंबा समय लग गया. नेहा ने यह भी कहा कि मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता हारने के बाद भी उनका मन काफी टूट गया था. उस समय वह मानसिक रूप से बेहद कमजोर महसूस कर रही थीं और भावनात्मक रूप से उबरने में महीनों लग गए. उनका यह अनुभव बताता है कि शब्दों का असर इंसान के मन पर कितनी गहराई से पड़ सकता है.

हुमा कुरैशी ने भी साझा किया दर्द

इस बातचीत के दौरान अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने भी अपने संघर्षों के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि दूसरी फिल्म के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें काफी ट्रोल किया गया था. लोगों के कटु कमेंट्स ने उन्हें अंदर तक डरा दिया था. हुमा ने कहा कि वह धीरे-धीरे लोगों से दूर रहने लगी थीं और खुद में सिमट गई थीं. बाद में उन्होंने थेरेपी लेना शुरू किया और डायरी लिखने की आदत डाली, जिससे उन्हें मानसिक रूप से राहत मिली. हुमा और नेहा दोनों की बातों ने यह साफ कर दिया कि फिल्म इंडस्ट्री में कलाकार सिर्फ कैमरे के सामने नहीं लड़ते, बल्कि उन्हें मानसिक दबाव और लोगों की राय से भी जूझना पड़ता है. कई बार सफलता के पीछे बहुत बड़ा भावनात्मक संघर्ष छिपा होता है.